अज्ञेय

अज्ञेय की कहानियों का पारिस्थितिकी पाठ

जिज्ञास, शरणदाता, हारिति और रोज के विशेष संदर्भ में - मनमीत कौर
हमारी पृथ्वी एक महान पारिस्थितिक तंत्र है जिसमें समस्त जीव समुदाय एक-दूसरे पर आश्रित हैं। प्रकृति में सभी जीव जरूरी हैं तथा पर्यावरण पर सभी का हक है। सभी जीवों में मानव चूँकि सबसे अधिक विकसित और सोचने-विचारने वाले दिमाग का प्राणी है तथा पर्यावरण का उपभोक्ता भी है, अत: इसके भले-बुरे का जिम्मा भी उसी का है। यह पारिस्थितिक चिंतन वर्तमान समय का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। प्रस्तुत आलेख में पारिस्थितिकी के संदर्भ में अज्ञेय की कुछ कहानियों पर विचार किया जा रहा है।

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