कविता

बस थोड़ी देर बाद

मेरे बेटे
जब छोटे थे तुम
मेरे हाथों को रहता
बहुत सारा काम
मिल नहीं पाता था
जरा भी आराम
तुम चाहते थे मैं
हर पल रहूँ तुम्हारे साथ
और मैं कहती
आती हूँ बेटा
बस थोड़ी देर बाद

1.
तुम्हारी आखें मुझे देखते ही
विहंस उठतीं
अंग-अंग चपल हो कहता
माँ लो सीने से लगा
पर मैं तुम्हें झूले में लिटा
कहती हूँ बेटा
बस थोड़ी देर बाद

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मैं बस्तर हूँ

समृद्ध, संपन्न
लेकिन निर्धन
$खून से तर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मैं मुर्गी हूँ
जो सोने का अण्डा
देती है
और अण्डे को
बारूद पर सेती है
मैं गुमनाम लोगों का
घर हूँ
अब तो बन्द
हो गई रुलाई
एक तर$फ कुँआ
एक तर$फ खाई
एक तर$फ जवान
एक तर$फ हैवान
मौत के आगे

मैं मजबूर हूँ
सो बदतर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मेरे नामा पर राजनीति
•िान्दगी हार गई
मौत जाती
अब समझ गये
चिमनियों की ऊँचाई
कितनी होती
मैं खौ$फ हूँ
मैं डर हूँ
मैं बस्तर हूँ

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सभी चीजें खरीदी नहीं जाती - पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

आप सौदागर हैं
कुछ भी $खरीद
सकते हैं
परन्तु
इतनी-सी बात
आपकी समझ में
नहीं आती
कि
दुनिया में सभी
ची•ों खरीदी
नहीं जाती

आप मँहगा पलंग
$खरीद सकते हैं
पर नींद नहीं
आप व्यन्जन
$खरीद सकते हैं
पर भूख नहीं
आप औरत
$खरीद सकते हैं
पर प्यार नहीं
आप चाटुकार
$खरीद सकते हैं
पर यार नहीं

मानता हूँ
पैसे में बहुत
ता$कत होती है
पर सभी ची•ों
बिकाऊ नहीं होती हैं

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