खिलते फूल लहराता तिरंगा

सादर समर्पण!
परम पूज्यवर पिता श्री स्व.पंचराम कैवर्त जी (भू.पू.शि.एवं समाजसेवी) को सादर समर्पण । जिनके विचारों एवं भावो से अभिप्रेरित मैं अपना प्रथम बाल काव्य संग्रह श्खिलते फूल लहराता तिरंगा श् प्यारे बच्चों को भेंट करने में समर्थ हुआ हूँ । मेरे बालगीत किंचित भी नन्हे-मुन्हो की शिक्षा-दीक्षा में उपयोगी हुआ तो यह मेरा परम सौभाग्य होगा ।

आमुख
बाल कविता एक गंभीर विद्या है । इसका अस्वाद बच्चे तो लेते ही हैं, बड़े भी लेते हैं। सफल बाल-साहित्य वही है जिसे बच्चे सरलता से अपना सके और भाव ऐसे हो जो बच्चों के मन को भा जायें । इस दृष्टि से देखा जाए तो श्री खेलन प्रसाद कैवर्त ‘‘अभिनव’’ खरे उतरते हैं ।
‘‘खिलते फूल लहराता तिंरंगा’’ ‘अभिनव’ जी की पहली कृति है । इस संकलन में कुल 51 कविताएं संकलित है। देश प्रेम की सुमधुर कविताओं से लेकर सूरज, बादल, फूल, पेड़, बगिया के साथ जंगल, बंदर, भालू, कौवा, कोयल आदि से जूड़ी कविताएं प्रकृति से रागात्मक लगाव की प्रेरणा देती है तथा बाल मन का रंजन करने के साथ ही साथ कुछ न कुछ सार्थक संदेश भी देती है ।
कुल मिलाकर विविध विषयों की ये बाल कविताएं बच्चों को पसंद आयेंगी । मेरा आत्म विश्वास यही है शुभेच्छाएं भी ।
(शंभूलाल शर्मा 'बसंत')
शिव कुटीर, करमागढ़, रायगढ़ (छ.ग.)

स्वतंत्रता दिवस
2015

होली के बिखरते रंगो में
मै जीवन का खिलता,
बसंत देखता हूँ
खिल-खिलाते बालरंगो में
मैं वतन का लहराता
तिरंगा देखता हूँ ।

भूमिका
हिन्दी बाल साहित्य की बड़ी तीब्र गति से प्रगति हो रही है तथा इसकी विभिन्न विद्याओं पर बड़ी संख्या में बाल साहित्य लिखा जा रहा है । इनमें बाल कविता प्रमुख है ।
बाल कविता का सृजन बाल साहित्यकारों के साथ ही सामान्य साहित्यकार भी कर रहे हैं बाल साहित्य विशेष रूप से बाल कविता का सृजन सरल कार्य नही है । इसके लिए साहित्यकार को बच्चों के मानसिक धरातल पर उतरना पड़ता है, सम्भवतः यही कारण है कि अनेक साहित्यकारों ने पहले बाल साहित्य का सृजन किया, किन्तु सफलता न मिलने पर उन्होंने बाल साहित्य लिखना छोड़ दिया और बड़ो के लिए लिखने लगे तथा इसमें वे सफल हो गए ।
बाल कविता में सदैव सरल छोटे और प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाता है । इसमें अधिकतम 24 पंक्तियाँ होती है, शिशु गीतों में तो 4 से लेकर 12 तक ही पंक्तियाँ होनी चाहिए बाल कविता में बच्चों की रूचि के विषय होते है । इसमें चूहा, बिल्ली, तोता, पापा, मम्मी, गुड़िया, सरकस, तितली आदि परम्परागत विषयों अथवा रोबोट, कम्प्यूटर, मोबाइल जैसे आधुनिक विषयों को लिया जाता है बाल कविता गेय होती है । इसकी प्रस्तुति इस प्रकार की जाती है कि बच्चों के सम्मुख एक आकर्षक चित्र उभर आता हो । यहाँ पर विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि बाल कविता का प्रमुख उद्देश्य बाल मनोरंजन है । बाल मनोरंजन को बाल कविता का प्राण तत्व भी कहा जा सकता है इसके अभाव में बच्चे बाल कविता पर ध्यान ही नही देंगे । बाल साहित्यकार यदि बच्चों को नैतिक शिक्षा देना चाहता है तो उसे नैतिक शिक्षा मनोरंजन की चाशनी में लपेट कर देनी चाहिए । प्रत्यक्ष नैतिक शिक्षा बच्चे पसंद नही करते हैं शिशु गीतों में तो केवत मनोरंजन ही होना चाहिए ।
‘‘ बन्दर मामा लेकर आए, अमरीका से कार ।
टक्कर मारी हाथी जी ने, कार हुई बेकार ।।’’
बाल साहित्य की सभी विधाओं के सामान बाल कविता में भी भ्रामक तथ्यों से बचना चाहिए । जन सामान्य में प्रचलित हो जाने के बाद भ्रामक तथ्य सरलता से समाप्त नही होते हैं । उदाहरण के लिए कोयल काली नही होती है और न ही उसकी आवाज मीठी होती है, वास्तव में नर कोयल का रंग काला होता है और उसकी आवाज मीठी होती है । मादा कोयल चितकबरे रंग की होती है और उसकी आवाज सामान्य पक्षियों की तरह होती है इसीलिए मैंने सूचनात्मक बाल साहित्य की बात की है तथा वास्तविक सूचनाएँ देने वाली अनेक कविताओं का सृजन किया है कोयल की शारीरिक संरचना के सम्बन्ध में मैंने लिखा है-
‘‘सर से पूँछ तलक नर काला, पीली चोंच निराली ।
मादा का रंग गहरा भूरा, बिन्दी चित्तीवाली’’।।
वर्तमान समय में अनेक साहित्यकार बाल साहित्य का सृजन कर रहे हैं । इनमें से एक नाम है-खेलन प्रसाद कैवर्त ‘‘अभिनव’’ कैवर्त जी एक लम्बे समय से बाल कविता लिख रहे हैं उन्होेंने बाल कविता की एक पुस्तक भी तैयार की है- ‘‘खिलते फूल लहराता तिरंगा’’

इस पुस्तक की अधिकांश बाल कविताएँ पारम्परिक विषयों पर केन्द्रित है । अपनी कविता ‘‘गंदगी की राज कुमारी’’ में उन्होने मक्खी का अच्छा चित्र खींचा है-
‘‘भन-भन, भन-भन गाती । हमें जगाने वो आती ।।’’
इसी प्रकार कछुए का चित्र भी आकर्षक है-
‘‘कछुआ दादा चले बाजार । गाते गीत बसंत बहार।।’’
कैवर्त जी की बाल कविताओं में विविधता है । उन्होंने मामा जी, रद्दी वाला, समय की धारा, नन्हा सिपाही, बादल, रेल, अनुशासन, सूरज, स्वतंत्रता दिवस, जैसे विषयों पर बाल कविताओं का सृजन किया है । उनकी एक कविता ‘‘बिटिया रानी’’ में बड़ी सरल, सहज और स्वाभाविक प्रस्तुति देखी जा सकती है-
‘‘बिटिया रानी, बिटिया रानी, बनती हो तुम, बड़ी सयानी ।
दिखती भोली-भाली सूरत, होती है सबको हैरानी ।।’’
अधिकांश हिन्दी बाल साहित्यकारों ने तोता, कौआ, कोयल आदि पक्षियों पर बाल कविताओं का सृजन किया है । इनमें गौरैया सर्वाधिक लोकप्रिय है, किन्तु गौरैया को लोग गौरैया न कहकर चिड़िया कहते हैं, गौरैया अर्थात चिड़िया पर कैवर्त जी लिखते हैं-
‘‘चिकचिक, चिकचिक,चिकचिक,चिकचिक, शोर मचाती आती चिड़िया ।
ताजे ताजे सुर सरगम में, मीठे गीत सुनाती चिड़िया ।।’’
कैवर्त जी ने अपने कुछ बाल कविताओं में कहावतों और मुहावरो का बड़ा शानदार प्रयोग किया है-
‘‘नभ से गिरे, खजूर पर लटके ।
हवा हो गए, सब लटके झटके ।।‘‘
‘‘खिलते फूल लहराता तिरंगा’’ की अधिकांश बाल कविताएं भाव प्रधान है इनमें विविधतापूर्ण विषयों को नए ढंग से प्रस्तुत किया गया है ।

(डाॅ. परशुराम शुक्ल)
आइवरी-23 प्लेटिनम पार्क
टी.टी.नगर भोपाल (म.प्र.) 462003
मो. 9926856086

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