गाँधी की अहिंसा, बुद्ध की दया

आतंकवाद - डॉ. सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव

एक भयाचार, न कोई सोच न धर्म
कुछ सिरफिरे दिमागों की उपज कुस्सित
कभी जमीन, कभी सियासत, कभी पर्व
अकस्मात् संकट में पड़ जाते,
तब खंजर, तेग, बन्दूकें, हथगोले
बंद मुट्ठियों यों थम जाते,
फिर उठता एक नाद 'जेहाद'
ईश्वर के नाम पर हिंसा, उन्माद
दहशत, पाश्विक वृत्ति, अत्याचार
लहू बहाने का शौक, आत्मतुष्टि
यही है लक्ष्य कि मिट जायेंगे
मिटा देंगे मानवता, इस धरती से
ऐसा ही देश में सम्पन्न निरन्तर,
गाँधी की अहिंसा, बुद्ध की दया
महावीर का अस्तेय सब मिथ्या
मुहम्मद, इंसा, मूसा, शंकरा-मर्म
सभी पर आपदा छायी तदनन्तर,
निकल पड़े हैं धर्मध्वजावाहक
स्त्रियों-बच्चों-बूढ़ों को काटने-छाँटने,
निरपराधों, निरीहों को बंधक बनाने
जयकारे लग रहे जन-जन को बाँटने।

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