जैव विविधता छ.ग. के विशेष संदर्भ में

दुनिया में जो भी वस्तु दृष्टिगोचर हो रही है वह समयानुसार अपना परिवर्तित करती रहती है। इसी नियम का अनुसरण करते हुए सभी ग्रह नक्षत्र व जीव अपना जीवनकाल निर्वहन करते हैं।
हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति ग्रह, सूर्य, चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई, कैसे बना यह रहस्य सभी जानने के उत्सुक दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी यूनीवर्स की उत्पत्ति बीग बैंक के विस्फोट के बाद हुई और यूनीवर्स का विकास हुआ। एक छोटे से पार्टीकल (अंश से) में संपूर्ण यूनीवर्स समाया हुआ था। मान्यता अनुसार यूनीवर्स गैलेक्सी अपने साथी से दूर जा रहे थे। पहले सभी पास-पास थे फिर बाद में एक दूसरे से दूर जाने लगे थे। ये कितने पास थे और कितनी दूर गये थे समझ से परे हैं। यूनीवर्स या पृथ्वी की उत्पत्ति छोटे पार्टीकल के विस्फोट अथवा फैलाव से हुआ, ऐसा विद्वान मानते हैं।
एक अनुमान के अनुसार 4.6 मिलियम अरब वर्ष पूर्व हमारी पृथ्वी बनी। पृथ्वी के बनने के एक वर्ष तक तरल व्यवस्था में थी। बाद में यहां जीवन आया। जीव बने पहले कम प्रकार में जीव बने बाद में बड़े। डायनासॉर एवं जायनॉसारस बड़े जीव हुए कई छोटे जीव भी आये उसके कुछ समय बाद लगभग पाँच प्रजातियों का एक संस्था समाप्त हो गये। इसे ही महाप्रलय कहा जाता है। महाप्रलय का कारण ताप के बढऩे व कम होने से हुआ। आज विश्व में जो जीव दिखाई देते हैं वे 5 प्रतिशत ही बचे हैं। 95 प्रतिशत नष्ट हो गयए हैं। उसमें से भी 90 प्रतिशत के नाम हमें नहीं मालूम है। केवल 10 प्रतिशत के नाम जानते हैं।
लंबे जीवनकाल वाले जीवों में मगर, घडिय़ाल, कछुवा रहे हैं। पृथ्वी पर बहुत से जीव आये और चले गए। मानव का भी उद्भव इन्हीं जावों के साथ हुआ। आज हम खोजों के माध्यम से 17,18 लाख प्रजाति को जान रहे हैं। लगभग 10 प्रतिशत वनस्पति एवं 90 प्रतिशत मांसाहार पर निर्भर है। एक जीव दूसरे जीव का उपभोग कर भक्षण करता है।

प्रो. मनोहर लाल सिन्हा
सहा प्रा. (भूगोल) मां बहादुर कलारिन कला एवं विज्ञान महाविद्यालय गुरुर (छ.ग.)

(गाईड)
डॉ. एल.एन. वर्मा
पूर्व प्राचार्य शा. महाविद्यालय, रायगढ़ (छ.ग.)

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