त्रिविध कर्म विज्ञान - डॉ. बालेन्द्र सिंह डॉ. श्वेता सिंह

प्रकाशक
वैभव प्रकाशन
अमीनपारा चौक, पुरानी बस्ती रायपुर (छत्तीसगढ़)
दूरभाष : 0771-4038958, मो. 94253-58748

आवरण सज्जा: कन्हैया साहू
प्रथम संस्करण : 2015
मूल्य : -150.00 रुपये
कॉपी राइट : लेखकाधिन

समर्पण
प्रो. रमेश चन्द्र आर्य
विभागाध्यक्ष - शल्य तंत्र विभाग
राजीवगांधी राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय
पपरोला, कांगड़ा (हि.प्र.)

त्रिविध कर्म विज्ञान
डॉ. बलेन्द्र सिंह
डॉ. श्वेता सिंह
प्राक्कथन

प्रस्तुत पुस्तक 'त्रिविध कर्म विज्ञान' की रचना आयुर्वेद के स्नातक व स्नातकोत्तर (शल्य तंत्र) छात्रों व शल्य चिकित्सकों (आयुर्वेद) के लिए की गई है, विषयवस्तु को संक्षिप्त परन्तु सारगर्भित करने का प्रयास किया गया है, जिससे कि अध्ययनकत्र्ता को स्पष्ट रुप से समझने में सहायता मिल सके। संपूर्ण विषयवस्तु तीन खंड में विभाजित है- 1. पूर्वकर्म 2. प्रधानकर्म 3. पश्चात कर्म। संपूर्ण पुस्तक को शास्त्रीय संदर्भों, रेखाचित्र व वास्तविक चित्रों के माध्यम से विषय को सरल एवं बोधगम्य बनाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक को विषयानुरुप पूर्ण करने का प्रयास किया गया है और अभी तक इस विषय से संबंधित स्वतंत्र पुस्तक आयुर्वेद संकाय में उपलब्ध नहीं है। यथावश्यकता इसमें आधुनिक युगानुरुप विषयवस्तु को सचित्र प्रस्तुत किया गया है ताकि पुस्कर अपने आप में परिपूर्ण हों। पुस्तक लेखन का यह हमारा प्रथम प्रयास है।
इस पुस्तक को त्रुटि रहित बनाने में भरपूर प्रयास-परिश्रम किया गया है। यद्यपि त्रुटियां होंगी, सुधार हेतु सबका सहयोग अपेक्षित व स्वागत योग्य है। ताकि आगामी संस्करणों में उनमें सुधार किया जा सके।
हमें आशा है कि यह प्रकाशन विद्यार्थियों, अध्यापकों और शल्य चिकित्सकों के लिए त्रिवधि कर्म को बेहतर तरीके से समझने तथा प्रयोग करने में उपयोगी सिद्ध होगा।
द्य पुस्तक के लेखन में हमारे परिवारजनों, गुरुजनों, साथियों, छात्रों तथा गं्रथालय, शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर से महत्वपूर्ण सहायता मिली है। हम इन सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, साथ ही हम अपनी पुत्री आयुषी सिंह जिसकी मधुर मुस्कान मन को प्रफुल्लित कर देती है, का आभार प्रकट करना मैं नहीं भूल सकता हूं।
द्य अंत में हम पुस्तक के सुन्दर मुद्रण के लिए प्रीतम साहू (टाईपिस्ट) की तथा रुपसज्जा के साथ अल्पसमय में ही प्रकाशित किये जाने के लिए प्रकाशक महोदय का आभार व्यक्त करते हैं जिनके सतत प्रयास से यह पुस्तक पाठकों के समक्ष इस रुप में प्रस्तुत हो सकी।

डॉ. बलेन्द्र सिंह
डॉ. श्वेता सिंह

आभार

श्री महाकालेश्वर भगवान जी कृपा से प्रस्तुत कृति स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों (शल्य तंत्र) एवं आयुर्वेद शल्य चिकित्सकों व विद्वानों के समक्ष उपस्थित है।
द्य प्रस्तुत कृति को इस स्वरुप में लाने में गुरुवर प्रोफेसर रमेशचन्द्र आर्य, एम.डी. (शल्यतंत्र), पी-एच.डी., विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर शल्य तंत्र विभाग राजीव गांधी राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय पपरोला कांगडा (हि.प्र.) के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं था। 'सादा जीवन व उच्च विचारÓ को चरितार्थ होते मैंने गुरुवर में ही देखा। इनकी विद्वता के आगे सभी नतमस्तक रहते हैं। सौभाग्यवश ऐसे गुरु के चरणों में ही मुझे स्नातकोत्तर शल्यतंत्र अध्ययन का अवसर मिला तथा आपके समक्ष जो कुछ भी है, वह गुरुवर का आशीर्वाद है। (साथ ही आपकी पुस्तक ्र द्वड्डठ्ठह्व ड्डद्य शद्घ द्मह्यद्धड्डह्म्ह्यह्वह्लह्म्ड्डद्मड्डह्म्द्वड्ड की सहायता इस पुस्तक में ली गई है)। मैं आभार जैसे शब्द से गुरुवर की गुरुता को कम नहीं करना चाहता हूं। मैं गुरुवर का जीवन पर्यन्त चिरऋणी रहँूगा।
द्य डॉ. अनितदत्त धीमान सर जिनसे संज्ञाहरण विज्ञान व डॉ. अनिल शर्मा सर जिनसे क्ष-किरण विद्वान व डॉ. कुलवंत सर से शल्य तंत्र के मूलभूत सिद्धांतिक व प्रायोगिक ज्ञान प्राप्त किया, मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।
द्य प्रो. बी.एल. खण्डेलवाल (पूर्व विभागाध्यक्ष), जिन्होंने सदैव मार्गदर्शन व आशीर्वाद दिया मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।
द्य प्रो. एस.के. अहिरवार, प्राचार्य व विभागाध्यक्ष (शल्यतंत्र), शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर, जिन्होंने पुस्तक लेखन हेतुम समय-समय पर परामर्श व प्रोत्साहन दिया, मैं उनका हृदय से आभार प्रकट करता हूँ।
द्य प्रो. जी.एस. बघेल (उज्जैन), प्रो. दिनेश कुमार खरे (उज्जैन), प्रो. जे.पी. चौरसिया (उज्जैन), पूर्व प्राचार्य व प्रो. डी.के. तिवारी (रायपुर), पूर्व प्राचार्य व प्रो. डी. के. कटारिया (रायपुर), प्रो. आर. एन. त्रिपाठी (रायपुर) का आभार प्रकट करना नहीं भूल सकता हूँ। जिनके आशीर्वाद से मैं यहाँ तक पहुँच सकता हूँ।
द्य मेरे वरिष्ठ डॉ. बालकृष्ण सेवत्कर (जयपुर), डॉ. नरिन्दर सिंह (जयपुर), डॉ. भुपिन्दर सैनी (हरियाणा), डॉ. अनामिका (हरियाणा), डॉ. एल.एस. पाणिग्रही (रायपुर), डॉ. अखिलेश भारद्वाज (ग्वालियर), डॉ. संतोष मौर्य व मेरे सहपाठी डॉ. सूरज खोदरे (इन्दौर), डॉ. कौशिक दास महापात्र (दिल्ली), डॉ. पंकज भारती (वी.एच.यू.), डॉ. जी.एस. भंडारी (पपरोला), डॉ. प्रीतपाल सिंह (उज्जैन), डॉ. सोनिया शर्मा (पपरोला), डॉ. देविन्दर (पपरोला), डॉ. नीलेश माहोर (गुना), डॉ. शांतनू मिश्रा (पन्ना), डॉ. दिनेश पटेल (पन्ना), डॉ. अखिलेश खरे (पन्ना) तथा मेरे अनुज डॉ. शिशिर प्रसाद (हरिद्वार), डॉ. कल्पनाथ सिंह (बनारस), डॉ. सलील जैन (उज्जैन) आदि विद्वानों का आभार प्रकट करता हूँ, जिनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहायता मुझे प्राप्त हुई।
मेरे सहकर्मी व मित्र डॉ. राजेश सिंह, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. राजेश मंत्री, डॉ. सुभाष धरणे, डॉ. ओ.पी. रांऊत, डॉ. मनोज दास व जिन मित्रों ने अप्रत्यक्ष रुप से पुस्तक लेखन में सहयोग प्रदान किया मैं आभार प्रकट करता हूँ।
मैं अपने शिष्य डॉ. भारती परिहार, डॉ. नम्रता कुलश्रेष्ठ, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. विजयलक्ष्मी चन्द्रा तथा सभी स्नातकोत्तर छात्रों (शल्यतंत्र) को धन्यवाद देना आवश्यक समझता हूँ, जिन्होंने प्रत्यक्ष व परोक्ष रुप से सहयोग दिया है।
मैं ओ.टी स्टॉफ सिस्टर सुनीता, सिस्टर निरुपा, सिस्टर अरुणीमा व मेरे समस्त रुग्ण व्यक्तियों का मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूं।
द्य एक पुस्तक की रचना हेतु भारमुक्त जीवन की आवश्यकता होती है, आज के भौतिकवादी व संघर्षशील जीवन में विषय चिंतन हेतु समय निकालन अति कठिन हो जाता है। अधिकतर समय महाविद्यालय व चिकित्सालयीन कार्यों में तथा शेष बचा समय ग्राहस्थ्य कार्यों में निकल जाता है। इन अवस्थाओं में पुस्तक लेखन का कार्य अति दुरुह हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में कुछ समय मिलने पर लेखन कार्य में बाधा न पड़े इसके लिए सदैव सजग रहने वाली मेरी धर्मपत्नि डॉ. श्वेता सिंह व साथ ही पुत्री आयुषी जिसकी मुस्कान मन को प्रफुल्लित कर देती है, का आभार प्रकट करना मैं नहीं भूल सकता हूँ।
द्य माता-पिता एवं सास व ससुर जी जिनके आशीर्वाद से मैं इस पुस्तक की रचना कर सका हूँ, उनका मैं सदैव ऋणी रहूँगा।
द्य अंत में पुस्तक के सुंदर मुद्रण के लिए टाइपिस्ट प्रीतम कुमार साहू तथा रुपसज्जा के साथ अल्य समय में ही प्रकाशित किये जाने के लिए प्रकाशक महोदय का आभार प्रकट करता हूँ, जिनके सतत प्रयास से यह पुस्तक पाठकों के समक्ष इस रुप में प्रस्तुत हो सकी।

डॉ. बलेन्द्र सिंह
डॉ. श्वेता सिंह

अनुक्रमिणिका

क्रमांक अध्याय नाम पृष्ठ क्रमांक

1. क्षार एवं क्षारसूत्र निर्माण
2. त्रिविध कर्म- पूर्वकर्म, प्रधानकर्म और पश्चात कर्म

3. यंत्र-शस्त्र-उपकरण व पट्ट बंधन सामग्री
विसंक्रमण या शुद्धिकरण
4. शोधनीय व रोपणीय औषध
5. गुद की शारीरिक रचना
6. संज्ञाहरण
7. विबंध
8. गुद विद्रधि
9. भगन्दर
10. शल्यज नाड़ी रोग (पाईलोनॉइडज साईनस)
11. अर्श
12. चर्मकील (अरिकीलक या सौम्य अर्बुद)
13. गुदविदार (परिर्कर्तिका)
14. गुद भ्रंश
15. गुद पाक
16. गुद कण्डू

Tribidh Karm Vigyan
BY : Dr. Balendra Singh
BY : Dr. SHWETA Singh
Published by
Vaibhav Prakashan
Amin Para, Purani Basti
Raipur, Chhattisgarh  (India)
First Edition : 2015
Price: Rs.----.00

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