पं. माधव राव सप्रे

सच्ची और झूठी सफलता

सफलता के विषय में कुछ लिखने के पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि सफलता किये कहते हैं। बजुत लोग सफलता का यह अर्थ करते हैं कि उनकों कार्य या प्रयत्न समाप्त होने पर इच्छित फल मिल जाय। परन्तु सफलता का इतना ही अर्थ नहीं है। कोई-कोई मनुष्य अपना कार्य पूरा करने पर जब अपने विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति तथा प्राप्ति नहीं कर सकते-जब उन्हें इच्छित फल नहीं मिला-तब वे अपने को असफल मान लेते हैं। परन्तु सच बात ऐसी नहीं है। संसार में ऐसे बहुत से दृष्टान्त मिलते हैं जिन्हें हम असफलीभूत अथवा ''अकृतकार्य सफलताÓÓ कह सकते हैं। फिर सफलता है क्या?

Tags: 

Subscribe to RSS - पं. माधव राव सप्रे