मैं बस्तर हूँ

समृद्ध, संपन्न
लेकिन निर्धन
$खून से तर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मैं मुर्गी हूँ
जो सोने का अण्डा
देती है
और अण्डे को
बारूद पर सेती है
मैं गुमनाम लोगों का
घर हूँ
अब तो बन्द
हो गई रुलाई
एक तर$फ कुँआ
एक तर$फ खाई
एक तर$फ जवान
एक तर$फ हैवान
मौत के आगे

मैं मजबूर हूँ
सो बदतर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मेरे नामा पर राजनीति
•िान्दगी हार गई
मौत जाती
अब समझ गये
चिमनियों की ऊँचाई
कितनी होती
मैं खौ$फ हूँ
मैं डर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मेरी फोटो आज
टाँगने के काम आती है
मेरी सन्तानें
नाचने के काम
आती हैं
मेरी संस्कृति बस
$िफल्माई जाती है
जब सब कुछ
ठूँठ हो जाता है
तोत मोमबत्तियाँ
जलाई जाती हैं
मैं आज लहू से
तर-ब-तर हूँ
मैं बस्तर हूँ

सुना है-
दिल्ली से खू़ब
पैसा आता है
लेकिन
मुझ तक पहुँचने के
पहले ही पैसे का
पैर निकल जाता है
और उल्टे पाँव
लौट जाता है
विकास का सपना
सपना रह जाता है
मैं सपने का स्कूल हूँ
सपने का अस्पताल हूँ
सपने का घर हूँ
मैं बस्तर हूँ

मैं मानव अधिकार
की बहस हूँ
उद्योगपतियों की
हवस हूँ
मैं सरकार बनाने का
एक यंत्र हूँ
मैं अरण्य-पुत्रों की
गु•ार-बसर हूँ
मैं बस्तर हूँ

लेकिन लोग
मेपे हर दरख्त को
नक्सली मानते हैं
वे मेरे भोलेपन को
कहाँ जानते हैं
अब मुझे लोग
'नक्सल भू-भागÓ के
नाम से जानते हैं
प्रवेश करने के पहले
घबराते हैं
मुझ में 'माँ दन्तेश्वरीÓ
का वास है
चित्रकोट का
जलप्रपात है
मैं अकेले में
फूट-फूटकर रोता हूँ
मैं •िान्दगी का
अन्तिम प्रहर हूँ
मैं बस्तर हूँ

लोगों ने लाखों कमा लिए
मेरे विकास पर
करोड़ों बना लिए
मेरे विनाश पर
अरबों खा गए
मेरे सत्यानाश पर
मैं फिर भी कुबेर हूँ
शाश्वत हूँ
निरन्तर हूँ
मैं बस्तर हूँ

वे मेरे साथ हैं
मेरा हर दरख़्त
रात होते ही
कार्बन डाईऑक्साइड
छोड़ता है
और कोई चालबा•ाी करे
तो
उसे कहीं का नहीं
छोड़ता है
प्रेम, स्नेह, अपनापन
सब मेरे पास है
लेकिन कोई मुझे
ठगना चाहे
उसकी अर्थी के लिए
मेरे पास बाँस है
मैं दवा हूँ
मैं •ाहर हूँ
मैं बस्तर हूँ

सुर और असुर में
मुठभेड़ जारी है
निर्दोष मर गये
कैसी लाचारी है
चलूँ! बहुत देर हो गई
मुझे लाशें उठाना है
मरघट ले जाना है
जंगल में मरघट नहीं
कहाँ जाना है

जिस कोख ने जन्म दिया
उसी कोख में द$फनाया है
किसी का बेटा मरा
तुम्हें कोई $फर्क नहीं पड़ता
किसी का भाई मरा
तुम्हें $फर्क नहीं पड़ता
किसी का बाप मरा
तुम्हें $फर्क नहीं पड़ता
क्योंकि ये तुम्हारे लिए
एक वृक्ष है
और बस्तर यक्ष है
मैं दण्डाकारण्य हूँ
मैं भगवान राम की
डगर हूँ
रावण जरूर मरेगा
मैं राम का शर हूँ
मैं बस्तर हूँ।

-पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

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