लोकनाट्य

छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य परंपरा डॉ. श्रीमती श्रद्धा चंद्राकर

लोकनाट्य के लिए कई शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जैसे-लोकनाट्य, जनपद नाटक, पारंपारिक नाटक, ट्रेडीशनल नाटक, आनुष्ठानिक आर्ट किंतु ये सब गढ़े हुए आधुनिक शब्द हैं। लोकनाटक का सीधा-सादा अर्थ है, वह लोगों के साथ रहा है। किसी विद्वान ने बहुत अच्छी बात कही है कि लोटनाटक का प्रारंभ नहीं होता और अंत नहीं होता। वह हमेशा लोगों के साथ रहा है और रहता रहेगा। जिस दिन वह लोगों के साथ नहीं रहेगा वह मर जायेगा, खत्म हो जाएगा। कुछ ऐसे लोकनाट्य हैं जो खत्म हो चुके हैं।

लोकनाट्य के पीछे कोई शास्त्रीय योजना नहीं होती, वह लोकमानस का प्रतिबिंब है।

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