सभी चीजें खरीदी नहीं जाती - पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

आप सौदागर हैं
कुछ भी $खरीद
सकते हैं
परन्तु
इतनी-सी बात
आपकी समझ में
नहीं आती
कि
दुनिया में सभी
ची•ों खरीदी
नहीं जाती

आप मँहगा पलंग
$खरीद सकते हैं
पर नींद नहीं
आप व्यन्जन
$खरीद सकते हैं
पर भूख नहीं
आप औरत
$खरीद सकते हैं
पर प्यार नहीं
आप चाटुकार
$खरीद सकते हैं
पर यार नहीं

मानता हूँ
पैसे में बहुत
ता$कत होती है
पर सभी ची•ों
बिकाऊ नहीं होती हैं

संवेदना का मूल्य
कहाँ रहा
तभी तो 'मिसाइल मैनÓ ने
कहा-
'सपने वे
बड़े नहीं होते
जो सोने के बाद
आते हैं
सपने वे बड़े
होते हैं
जो सोने नहीं देतेÓ
अपने वे नहीं होते
जो रोने के
बाद आते हैं
अपने वे होते हैं
जो रोने नहीं देते
बड़े सौदागार हो न
तो रोते हुए के
आँसू $खरीदो
भूखे के लिए
रोटी $खरीदो
हबच्चों का बचपन
गाँव का भोलापन
मण्डप से छूटती
हुई रोली
दहेज के लिए
छोड़ी गई डोली
कुछ भी $खरीद लो
मुनाफे का सौदा है
$खुदा की इबादत है
सजदा है
बरकत ही बरकत है

आप ने कभी देखा
संवेदना स्टोर्स
अपनत्व सेन्टर
एहसास कार्नर
ये दिल के अन्दर
छुपा कर रखा जाता है
जो न $खरीदा जाता है
न बेचा जाता है

भौतिक सुखों के पीछे
जीवन की भूल-भुलइया
में हम भटक रहे हैं
प्रारब्ध का बहाना कर
वर्तमान में
अटक रहे हैं

हम सब कुछ
$खरीदना चाहते हैं
सुविधा के लिए
तैयार नहीं
असुविधाओं के लिए
हम समर्थ हैं
हेलीकॉप्टर से
केदारनाथ जा सकते हैं
पर क्या ईश्वर के
$करीब आ सकते हैं?
अमीरी की ठसक
उसी समय तक है
जब तक $गरीबी है
ये मान लो
अगर ईश्वर ने
तुम्हें ज्य़ादा दिया है
तो लौटाना है
किस बात का मोह
$खाली हाथ आना है
$खाली हाथ जाना है
अगर रोते चेहरे पर
करोड़ों $खर्च कर
मुस्कान आयेगी
तो आपकी $खरीददारी
सफल हो जायेगी
हम ईश्वर के सामने
$खुदा के सामने
याचक की तरह
$फरियाद करते हैं
फिर सभी चीजें
$खरीद लेेने का
दंभ भरते हैं
हम ऐसा
क्यों करते हैं?

- पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

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