जनजातियों की स्थिति और अस्मिता की तलाश: छत्तीसगढ़ के विशेष संदर्भ में

डॉ. तारणीश गौतम
सहायक प्राध्यापक (हिन्दी)
शासकीय महाविद्याल, ओडग़ी
जिला-सूरजपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ प्रदेश एक परिचय :-

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शिवनाथ बेसिन में भूमि उपयोग एवं कृषि नवाचार

प्राक्कथन - मुझे डा. (श्रीमती) शालिनी वर्मा की पुस्तक ‘‘शिवनाथ बेसिन में भूमि उपयोग एवं कृषि नवाचार‘‘ का प्राक्कथन लिखने में अत्यंत प्रसन्नता हो रही है । यह पुस्तक लेखिका के पी-एच. डी. शोध प्रबंध का संषोधित रूप हैं । यह शोध कार्य षिवनाथ बेसिन जिसमंे वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य के पाँच जिले - दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगँाव एवं कवर्धा शामिल हैं, के 33 गाँवों के 1838 कृषकों के साक्षात्कार से कृषि नवाचार एवं उसके निर्धारकों के बारे मे संग्रहित विस्तृत जानकारी पर आधारित है । प्राथमिक आँकड़ों पर आधारित यह पुस्तक कृषि के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सूचना है ।

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छत्तीसगढ़ी-प्रतिनिधि उपन्यासों में अस्मिता-बोध

छत्तीसगढ़ी-प्रतिनिधि उपन्यासों में अस्मिता-बोध
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर छत्तीसगढ़
के
कला-संकाय के अंतर्गत हिंदी विषय
में पी-एच.डी.
उपाधि हेतु प्रस्तुत
शोध प्रबंध
2015
शोधछात्रा
श्रीमती दुलारी चन्द्राकर
कल्याण स्नातकोत्तर
महाविद्यालय,
भिलाईनगर, (छत्तीसगढ़)
सह-निर्देशक
डॉ. फिरोजा जाफर अली
सहायक प्राध्यापक
कल्याण स्नातकोत्तर
महाविद्यालय,
भिलाईनगर, (छत्तीसगढ़)
अध्ययन-केंद्र
कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय
भिलाई नगर, जिला-दुर्ग (छत्तीसगढ़)
निर्देशक

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खिलते फूल लहराता तिरंगा

सादर समर्पण!
परम पूज्यवर पिता श्री स्व.पंचराम कैवर्त जी (भू.पू.शि.एवं समाजसेवी) को सादर समर्पण । जिनके विचारों एवं भावो से अभिप्रेरित मैं अपना प्रथम बाल काव्य संग्रह श्खिलते फूल लहराता तिरंगा श् प्यारे बच्चों को भेंट करने में समर्थ हुआ हूँ । मेरे बालगीत किंचित भी नन्हे-मुन्हो की शिक्षा-दीक्षा में उपयोगी हुआ तो यह मेरा परम सौभाग्य होगा ।

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जनजातियों में शिक्षा की स्थिति एवं समस्याएँ

लेखक
डॉ. छैल कुमार चंद्रवंशी
सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र)

सह लेखक
डॉ. जवाहर लाल तिवारी
वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र अध्ययनशाला
वैभव प्रकाशन
रायपुर (छ.ग.)

प्रकाशक
वैभव प्रकाशन
अमीनपारा चौक, पुरानी बस्ती रायपुर (छत्तीसगढ़)
दूरभाष : 0771-4038958, मो. 94253-58748

आवरण सज्जा : कन्हैया
प्रथम संस्करण : 2015
मूल्य : 200.00 रुपये
कॉपी राइट : लेखकाधीन

Status and Problems of Education in tribes

dr. jawahar lal tiwari

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ऊपरी महानदी बेसिन में जल संसाधन मूल्यांकन एवं विकास

पं. रविशंकर शुक्ल वि.वि. रायपुर को भूगोल विषय
में पी-एच.डी. उपाधि हेतु प्रस्तुत शोध प्रबंध, 2000

डॉ. कुबेर सिंह गुरूपंच
प्राचार्य, एम. जे. महाविद्यालय, भिलाई

ऊपरी महानदी बेसिन में जल संसाधन मूल्यांकन एवं विकास

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त्रिविध कर्म विज्ञान - डॉ. बालेन्द्र सिंह डॉ. श्वेता सिंह

प्रकाशक
वैभव प्रकाशन
अमीनपारा चौक, पुरानी बस्ती रायपुर (छत्तीसगढ़)
दूरभाष : 0771-4038958, मो. 94253-58748

आवरण सज्जा: कन्हैया साहू
प्रथम संस्करण : 2015
मूल्य : -150.00 रुपये
कॉपी राइट : लेखकाधिन

समर्पण
प्रो. रमेश चन्द्र आर्य
विभागाध्यक्ष - शल्य तंत्र विभाग
राजीवगांधी राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय
पपरोला, कांगड़ा (हि.प्र.)

त्रिविध कर्म विज्ञान
डॉ. बलेन्द्र सिंह
डॉ. श्वेता सिंह
प्राक्कथन

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संयुक्त प्रान्त में महिलाओं की सामाजिक स्थिति

स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व संयुक्त प्रान्त में महिलाओं की सामाजिक स्थितिः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
प्रियंका आनन्द
शोध छात्रा, इतिहास विभाग
दी0द0उ0गो0वि0वि0गोरखपुर

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अज्ञेय की कहानियों का पारिस्थितिकी पाठ

जिज्ञास, शरणदाता, हारिति और रोज के विशेष संदर्भ में - मनमीत कौर
हमारी पृथ्वी एक महान पारिस्थितिक तंत्र है जिसमें समस्त जीव समुदाय एक-दूसरे पर आश्रित हैं। प्रकृति में सभी जीव जरूरी हैं तथा पर्यावरण पर सभी का हक है। सभी जीवों में मानव चूँकि सबसे अधिक विकसित और सोचने-विचारने वाले दिमाग का प्राणी है तथा पर्यावरण का उपभोक्ता भी है, अत: इसके भले-बुरे का जिम्मा भी उसी का है। यह पारिस्थितिक चिंतन वर्तमान समय का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। प्रस्तुत आलेख में पारिस्थितिकी के संदर्भ में अज्ञेय की कुछ कहानियों पर विचार किया जा रहा है।

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गुरू नानक के काव्य में प्रकृति-चित्रण - मनमीत कौर

गुरू नानक सिक्खों के आदि गुरू हैं। उन्हें कोई गुरू नानक, कोई बाबा नानक, कोई नानक शाह, कोई गुरू नानक देव, कोई नानक पातशाह और कोई नानक साहब कहते हैं। भारतीय धर्म-संस्थापकों एवं समाज-सुधारकों में इनका गौरवपूर्ण स्थान है। मध्ययुग के संत कवियों में उनकी विशिष्ट एवं निराली धर्म-परंपरा रही है। वह उस धर्म के संस्थापक हैं जिसके आंतरिक पक्ष में विवेक, वैराग्य, भक्ति, ज्ञान, योग, तितिक्षा एवं आत्म-समर्पण की भावना निहित है और बाह्य पक्ष में सदाचार, संयम, एकता, भ्रातृभाव आदि पिरोए हुए हैं। गुरू नानक मध्ययुग के मौलिक चिंतक, क्रांतिकारी सुधारक, अद्वितीय युग-निर्माता, महान् देशभक्त, दीन-दुखियों के परम हितै

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