हाजिर है पुरातन शैली का नक्काशीदार फर्नीचर

घरों में फर्नीचर की सजावट के लिहाज से जब से कथित 'नया जमानाÓ आया है, नक्काशीदार फर्नीचर बनने और मिलने बंद हो गए हैं। पुराने अमीर-उमराव या पारसियों के घरों में तो आपको ऐसे फर्नीचर मिल जाएंगे, परंतु नवधनाढ्य या उच्च मध्यमवर्गीय लोग जो रेडीमेड फर्नीचर लेते हैं, वे आधुनिक डिजाइन के होते हैं- सीधे-सीधे हत्थे और चपटी पीठ वाले। आंशिक परिवर्तन को छोड़ दें तो ज्यादातर एक जैसे ही दिखते हैं। पुरातन पद्धति के नक्काशी किए हुए फर्नीचर ढूंढे नहीं मिलते। अब अगर कोई बनवाना चाहे तो मुंबई में उनका कारीगर मिलना मुश्किल है। ज्यादातर लोग मशीनों से सीधी कटाई-छंटाई करते हैं ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा फर्नीचर

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जिंदगी के बीचों-बीच रची-गढ़ी कविताएँ

- राजेन्द्र मिश्र
मुख्यतः सार्वजनिक थीमों में चरितार्थ इन कविताओं में जगत-गति और आत्म-गति के बीच एक गहरा उद्वेेलन है। ऐसे उद्वेलन को लेकर या तो विलाप किया जा सकता है या फिर व्यंग्य। दीपक ने व्यंग्य किया है, लेकिन उनकी कविता हिन्दी में लिखी गई उन सैकड़ों व्यंग्य कविताओं से बिल्कुल अलग है, जो मनुष्य को इकहरा और उसकी भाषा को पूरी तरह सपाट बना देती है। ध्यान और धैर्य से देखें तो कवि जैसे अमिधा में व्यंजना को मुक्त करने के लिए बार-बार एक अवकाष गढ़ रहा होता है। उसका ‘’बच्चो, मैंने बेहतर समय देखा है !‘’ अपनी परिणति में मनुष्य के इतिहास का सबसे ट्रैजिक समय बना दिया गया होता है।

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पुन्नी के चंदा - डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'

पुन्नी के चंदा - छत्तीसगढ़ी बाल गीत

डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'
ISBN- 81-89244-69-8

प्रकाशक
वैभव प्रकाशन
अमीनपारा चौक, पुरानी बस्ती रायपुर (छत्तीसगढ़)
दूरभाष : 0771-4038958, मो. 94253-58748

आवरण सज्जा : कन्हैया साहू
प्रथम संस्करण : 2014
मूल्य : 20.00 रुपये
कॉपी राइट : लेखकाधीन

Punni ke chanda
BY :Dr. Manik vishvkarma ‘navrang’

Published by
Vaibhav Prakashan
Amin Para, Purani Basti
Raipur, Chhattisgarh  (India)
First Edition : 2014
Price: Rs. 20.00

पुन्नी के चंदा

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सच्ची और झूठी सफलता

सफलता के विषय में कुछ लिखने के पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि सफलता किये कहते हैं। बजुत लोग सफलता का यह अर्थ करते हैं कि उनकों कार्य या प्रयत्न समाप्त होने पर इच्छित फल मिल जाय। परन्तु सफलता का इतना ही अर्थ नहीं है। कोई-कोई मनुष्य अपना कार्य पूरा करने पर जब अपने विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति तथा प्राप्ति नहीं कर सकते-जब उन्हें इच्छित फल नहीं मिला-तब वे अपने को असफल मान लेते हैं। परन्तु सच बात ऐसी नहीं है। संसार में ऐसे बहुत से दृष्टान्त मिलते हैं जिन्हें हम असफलीभूत अथवा ''अकृतकार्य सफलताÓÓ कह सकते हैं। फिर सफलता है क्या?

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महिनत म मोती मिलय (छत्तीसगढ़ी गीत) पीसी लाल यादव

प्रकाशक
वैभव प्रकाशन
अमीनपारा चौक, पुरानी बस्ती रायपुर (छत्तीसगढ़)
दूरभाष : 0771-4038958, मो. 94253-58748

आवरण सज्जा : कन्हैया
प्रथम संस्करण : 2015
मूल्य : 000.00 रुपये
कॉपी राइट : लेखकाधीन
महिनत म मोती मिलय
(छत्तीसगढ़ी गीत)
पीसी लाल यादव

ISBN-

l
mahinat ma moti milay

pisi lal yadav

Published by
Vaibhav Prakashan
Amin Para, Purani Basti
Raipur, Chhattisgarh  (India)
First Edition : 2015
Price: Rs. 000.00

समरपन

स्व. श्रीमती सोनकुंवर यादव

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