बेचैन करता हुआ नाद

डॉ. अमल सिंह ''भिक्षुकÓÓ
हिन्दी $ग•ाल की शुद्धता और विकास
'उनसे पूछो कि $ग•ाल क्या है $ग•ाल का उन क्याÓ
चंद लफ्जों में कोई आग छुपा दी जाये।
कोमल-कोमल $ग•ालों में तूफानों के पैगाम ''हफीजÓÓ
मीठी-मीठी बातों से भी तुम तो आग लगाते हो।Ó

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विडम्बना देखिये

जगदम्बी प्रसाद यादव
अंग्रेजी के खतरे बहुत हैं
स्वतंत्रता के अड़सठ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पर क्या हम इस गम्भीर तथ्य के प्रति सचेत हैं कि राष्ट्र बिना अपनी स्वतंत्र भाषा के गूँगा बना हुआ है और विश्व में इस दिशा में अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं बना पाया है। अंग्रेजों के जाने की स्वर्ण तो मनायी, पर यह न सोचा कि अंग्रेजी और अंग्रेजियत परतंत्रता के काल से भी अधिक सुदृढ़ होकर भारत और भारतीय भाषाओं पर राज कर रही है। आखिर यह कैसी विडम्बना है?

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