विधा के विकास के प्रति अपनी चिन्ता

डाॅ. छन्दा बैनर्जी
हिन्दी समालोचना के प्रणेता
पं. माधवराव सपे्र
पं. माधवराव सप्रे जी का युग भारतीय नवजागरण के ऐतिहासिक कालखण्ड का गौरवशाली युग था। सप्रे जी ने 1900 ई. में छत्तीसगढ़ मित्र के माध्यम से पत्रकारिता के क्षेत्र में अल्प समय में ही राष्ट्रीय पहचान बनाई। छत्तीसगढ़ मित्र तत्कालीन हिन्दी पत्रकारिता में विस्तृत

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एक विशिष्ट नायक पंडित माधव राव सप्रे

इस माह 19 जून को पंडित माधव राव सप्रे की 144 वीं जयंती मनायी जा रही है। सप्रेजी तत्कालीन मध्य प्रांत के एक विशिष्ट नायक थे जिन्होंने राष्ट्र सेवा की शुरूआत साहित्य और पत्रकारिता से की थी और फिर वे राजनीति में भी सक्रिय हुए थे। शायद सक्रिय राजनीति सप्रेजी जैसे स्वतंत्रचेता व्यक्ति के लिए उपयुक्त जगह नहीं थी इसीलिए सप्रेजी पुनः साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्र की राजनीति को दिशा देने में संलग्न रहे थे।

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आस्था और अन्धविश्वास में अंतर

बेहद पेचीदा है अन्धविश्वास और आस्था में अंतर की अंतर्कथा, आइये इसे इम्प्रो पद्धति से समझने की कोशिश करें।

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