October 22, 2026

देश-विदेश के सौ से अधिक कवियों ने कविता पढ़कर मनाया उत्सव

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संवेदना कविता की आत्मा – अनीता कपूर
रायपुर। भाषा अस्मिता अकादमी और जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान ने छत्तीसगढ़ मित्र के सहयोग से विमतारा में अंतरराष्ट्रीय काव्य उत्सव का आयोजन किया। देश-विदेश के सौ से अधिक कवियों ने कविता पढ़कर नक्सलमुक्त बस्तर के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की।
समारोह में अमेरिका से पधारी कवयित्री डॉ अनीता कपूर ने कहा कि मुख्य अतिथि डॉ अनीता कपूर अमेरिका ने भारतीय और अमेरिकी कवियों के लेखन संसार पर अपनी बात रखी। भारत में रिश्ते, संस्कृति और परंपरा के साथ संवेदना है तो अमेरिका की कविताओं में आधुनिकता, स्त्री मुक्ति, वैयक्तिकता और संवेदना साथ रहती हैं। भारत की कविता आत्मा को छूती हैं और अमेरिका की कविता आत्मा को जगाती है। संवेदना मूल रूप से कविता की आत्मा है। यह पूरी दुनिया में है। छत्तीसगढ़ के कवि लोक की आत्मीय संवेदना की पूर्ति करते हैं।
अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा छत्तीसगढ़ से बदलते बस्तर को सही स्वरूप में ले जाना है। बस्तर से सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त हुआ है। सांस्कृतिक दृष्टि से बस्तर को पिछले चालीस वर्षों में नुकसान हुआ है। वहां की सभ्यता और संस्कृति के विकास में हमारी भूमिका तय होनी चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर के आदिवासी सभी तीज तिहार अपनी परंपरा से मनाते हैं।‌ बस्तर से अंधेरा दूर हो गया है।‌ समारोह के प्रारंभ में स्वागत भाषण करते हुए संयोजक डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि दो महत्वपूर्ण साझा संग्रह बदलता बस्तर पर केन्द्रित है। जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष डॉ सीमा निगम ने कहा कि इन पुस्तकों के भीतर कविताएं और आलेख हैं। आलोचक और कवि जयप्रकाश मानस ने कहा कि कविता मुक्ति की मांग करती है, उस पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता। कविता में हमारे समय को और गति को नहीं ला पा रहे हैं तो वह विवेक का रंजन नहीं कर सकती।छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ अभिलाषा बेहार ने कहा कि कविता परंपरा का निर्वाह करती है। वह स्त्री के लिए पिता भी है।डॉ सुशील त्रिवेदी ने कहा कि साधारण और आम कवि साहित्य में युग का निर्माण हो रहा है। देश की आवाज साधारण लोगों की कविता होती है।डॉ आनंद प्रकाश त्रिपाठी सागर ने कहा कि एक कवि को निरंतर स्वयं अपना मूल्यांकन करना चाहिए। कविता अभ्यास की मांग करती है।आगरा से पधारी निमिषा सिंघल ने कहा कि महिलाओं संवेदना की सागर होती हैं। समारोह को डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग, युक्ता राजश्री, आदि ने संबोधित किया।
दो सत्रों में सौ से अधिक कवियों ने काव्य पाठ किया। अमेरिका के अलावा सागर, लखनऊ, आगरा, मुंबई और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से कवि आए थे। बस्तर से आए कवियों ने हलबी में गीत गाकर नक्सलमुक्त बस्तर का स्वागत किया। समारोह में डॉ रश्मिलता मिश्र और शशि दुबे ने विशेष वक्तव्य दिया। समारोह का संचालन डॉ सीमा अवस्थी, शुभ्रा ठाकुर, डॉ भारती यादव, सुमन शर्मा, प्रीति मिश्रा ने बारी बारी से किया।‌
समारोह में दस साल की बाल कवयित्री ने दोहे सुनाकर मुग्ध कर दिया अंत में डॉ सीमा निगम ने आभार व्यक्त किया।

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