July 22, 2026

कविता

सामान्य दिन व्हाया वही पुरानी चाय

सुबह उठा तो दरवाज़े पर एक चींटी मरी पड़ी थी। उसे उठाया नहीं क्योंकि दफ़नाने की जगह नहीं थी। चाय...

द्रवीभूत प्रार्थना

ईश्वर, मुझे और द्रवीभूत करो— इतना पारभासी कि मुझमें झाँकने वाली हर कुटिल आँख, परछाईं नहीं, अपना वास्तविक चेहरा देख...

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