कुछ लिखके सो कुछ पढ़कर सो…
कुछ लिखके सो कुछ पढ़कर सो, तू जिस जगह जागा सबेरे, उस जगह से बढ़कर सो। जैसा उठा वैसा गिरा...
कुछ लिखके सो कुछ पढ़कर सो, तू जिस जगह जागा सबेरे, उस जगह से बढ़कर सो। जैसा उठा वैसा गिरा...
हो जाती है उन लड़कियों को ख़ुद से ही नफ़रत, जो दिमाग़ की चौखट पर दिल की दस्तक सुनती हैं।...
✍️विरेंद्र शर्मा "अनुज" चौड़ी चौड़ी, सड़क बनाने, पहाड़ों को, मानव काट रहा है। हिमालय के, पोषक जड़ों को, बन के...
वफा का बोझ अब ढोना नहीं है किसी का भी हमें होना नहीं है समझ में आ गई तासीर तेरी...
जिसको जितनी चाहत है उसको उतनी ही लत है तुझे मिला या मुझे मिला अपनी-अपनी किस्मत है मंज़िल कब मिलती...
राखी क्यों जरूरी है सुनो मेरे यार, ये ही तो है भारत का सच्चा संस्कार। एक धागे में बंधा है...
प्रेम से जो सदा जलती,मैं वह ही रोसनाई हूं। दिखाए आंख जो टेढ़ी,मैं उनके हित कसाई हूं।। समूचे विश्व की...
'चीनी कम' बहुत पहले एक फ़िल्म आई थी पर स्क्रिप्ट तो लगता है आज के बजट के लिए लिखी गई...
रेशम की नाज़ुक-सी डोरी, जिसमें लिपटा बहन का प्यार, खुशियाँ लेकर देखो आया, राखी का पावन त्योहार। बहना के मन...
1922 की एक हिन्दी कविता कलरव किसको नहीं सुहाता कलरव किसको नहीं सुहाता? कौन नहीं इसको अपनाता? यह शैशव का...