जिसको जितनी चाहत है …
जिसको जितनी चाहत है उसको उतनी ही लत है तुझे मिला या मुझे मिला अपनी-अपनी किस्मत है मंज़िल कब मिलती...
जिसको जितनी चाहत है उसको उतनी ही लत है तुझे मिला या मुझे मिला अपनी-अपनी किस्मत है मंज़िल कब मिलती...
राखी क्यों जरूरी है सुनो मेरे यार, ये ही तो है भारत का सच्चा संस्कार। एक धागे में बंधा है...
प्रेम से जो सदा जलती,मैं वह ही रोसनाई हूं। दिखाए आंख जो टेढ़ी,मैं उनके हित कसाई हूं।। समूचे विश्व की...
'चीनी कम' बहुत पहले एक फ़िल्म आई थी पर स्क्रिप्ट तो लगता है आज के बजट के लिए लिखी गई...
रेशम की नाज़ुक-सी डोरी, जिसमें लिपटा बहन का प्यार, खुशियाँ लेकर देखो आया, राखी का पावन त्योहार। बहना के मन...
1922 की एक हिन्दी कविता कलरव किसको नहीं सुहाता कलरव किसको नहीं सुहाता? कौन नहीं इसको अपनाता? यह शैशव का...
तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा, मगर अच्छा नहीं लगता है गुज़र जाना मेरा। तूने पूछा ही नहीं...
सावन ने प्रेम लिखा है, हर पत्ती के हरे अधर पर। बादल ने संदेश सुनाया, भीगी-भीगी हर डगर पर॥ महुए...
आपके ख़त को हम ख़बर बताए बैठे हैं, आपके साये को भी हम घर बताए बैठे हैं। कब मिले थे...
सुन री, ज़िंदगी! हर बात पर, हर रोज़, हर किसी से समझौता करूँ? ये शर्तें मुझे मंजूर नहीं। मैं वो...