नया सफ़र-लघुकथा
- सन्दीप तोमर “आवेश! अब हम शादी के बंधन में बंध सकते हैं, एक टॉक्सिक रिश्ते से आज मुझे मुक्ति...
- सन्दीप तोमर “आवेश! अब हम शादी के बंधन में बंध सकते हैं, एक टॉक्सिक रिश्ते से आज मुझे मुक्ति...
थियेटर का आखिरी शो होते होते आस पास एक स्तब्ध सा अंधेरा फैल रहा था। दर्शकों का समूह कच्चे रास्तों...
अच्छाई पलट-पलट कर आती रहती है... ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में फ्लेमिंग नाम का एक गरीब किसान था। एक दिन वह...
बरसों-बरस बाद मेरा दिल्ली जाना हो रहा है. मैं अपनी मर्जी से वहाँ नहीं जा रहा हूँ, बल्कि पिताजी के...
फ़ैसला दस-पचास में बदला और इक पेड़ घास में बदला हर निराशा को आस में बदला जब अँधेरा उजास में...
एक घाव एक झिन रद्दा रेंगइया मनखे हर जंगल कोती ले जावत रिहिस। जेठ के महिना रिहिस। घाम हर मुड़ी...
डोली शाह फिरंगी लाल की कपड़े की छोटी-मोटी दुकान थी। लेकिन ग्राहकों की हर पसंद वहां मौजूद थी ।उसी दुकान...
"यह क्या कह रहे हो राजा, तुम नौकरी छोड़ कर क्या करोगे बेटा पागल हो गये हो क्या ?" "हाँ...
नशा नाश की जड़ है, सुन लो प्यारे बात हमारी, ये चक्कर घनचक्कर है। नशा नाश की जड़ है ।...
डोली शाह आज लंबे अरसे बाद मैंने रोहित को फोन किया।। इधर उधर की कुछ बातें कर मैंने ही पूछ...