June 4, 2026

हिंदी पत्रकारिता की द्वी-शताब्दी पर भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद की संगोष्ठी सम्पन्न

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भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के दो सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कोलकाता के कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त तत्त्वावधान में 29-30 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की स्थानीय संयोजक एवं कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सत्या उपाध्याय ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, अपितु भारतीय भाषिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता एवं राष्ट्रीय नवजागरण के उस अमर इतिहास का स्मरण-पर्व है, जिसकी प्रथम ज्योति इसी कोलकाता की पुण्यभूमि पर प्रज्ज्वलित हुई थी। भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के राष्ट्रीय संयोजक एवं महासचिव प्रो. संजीव कुमार दुबे ने प्रस्तावना में कहा कि परिषद ने पारस्परिक प्रयासों से क्षमता संवर्धन एवं अकादमिक उन्नयन का ध्येय लेकर संपूर्ण भारत के हिंदी प्राध्यापकों को एक मंच उपलब्ध कराया है। हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के विकास में पत्रकारिता के योगदान पर केंद्रित इस संगोष्ठी में गत दो शताब्दी के इतिहास का स्मरण करते हुए इस पर विचार किया जाएगा कि कैसे नये इंटरनेट, वेब माध्यमों माध्यमों पर आधारित पत्रकारिता में भाषा की शिष्टता, साहित्य की संवेदना, संस्कार और सामाजिक सरोकारों की रक्षा की जा सके। श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, सिक्किम के कुलपति प्रो. मोहन ने कहा कि नवजागरण की भूमि बंगाल में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता ने देश में स्वातंत्र्य चेतना जगाने में महती भूमिका निभाई है। कोलकाता के साहित्यकार डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने बशीर बद्र की पंक्ति ‘जी बहुत चाहता है सच बोलें, हौसला नहीं होता’ से पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति चिंता जताते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, नैतिक चेतना के प्रसार में पत्रकारिता की भूमिका का स्मरण किया। भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि कलम की ताकत तलवार से बढ़कर है, जिससे अंग्रेज भी डरते थे, इसलिए उन्होंने आरंभिक समय के कई पत्रिकाओं की जमानत जब्त कर ली, प्रतिबंधित किया। वरिष्ठ पत्रकार श्री राज मिठौलिया ने पंडित कृष्ण बिहारी मिश्र की पत्रकारिता संबंधी पुस्तक का जिक्र करते हुए बताया कि आरंभिक पत्र-पत्रिकाएं विपरीत आर्थिक परिस्थितियों में भी निकलीं, किंतु आज का पत्रकार विषम परिस्थितियों के कारण निम्न स्तर को अपनाने के लिए मजबूर हो जाता है। उद्घाटन सत्र में केरल से प्रो जयश्री, तेलंगाना से प्रो रेखारानी एवं आंध्र प्रदेश से प्रो रामप्रकाश ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आरंभ जोइता सिंह और मधुमिता मांझी के अभिनन्दन गीत ‘ओ जीवन पुण्य करो’ से हुआ। संगोष्ठी में आए प्रपत्रों के संकलन की संपादित पुस्तक “हिंदी पत्रकारिता में भाषा, साहित्य और संस्कृति, का लोकार्पण भी मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर ‘नागार्जुन और युद्ध प्रसाद मिश्र की प्रतिनिधि कविताएं’ (संपादक डॉ सत्यप्रकाश तिवारी) और ‘आलोचना के निकष पर सुगम’ (संपादक प्रो बहादुर सिंह परमार) नामक पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने किया।
प्रथम तकनीकी सत्र की विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रियदर्शिनी (अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, तेलंगाना) ने प्रेमचंद द्वारा स्थापित हंस और राजेन्द्र यादव द्वारा संपादित हंस पत्रिका के योगदान की चर्चा की। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से आईं विशेष अतिथि प्रो. गौरी त्रिपाठी ने हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में लघु पत्रिकाओं के योगदान पर वक्तव्य दिया। प्रो. रीना सिंह, जवाहरलाल नेहरू स्मारक महाविद्यालय, बाराबंकी ने कहा कि ‘सत्यं शिवम् सुंदरम्’ का भाव ही पत्रकारिता का मूल केंद्र बिंदु होना चाहिए। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. शंभूनाथ तिवारी (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) ने कहा कि आज मंजिल से आगे बढ़कर मंजिल की तलाश करने की आवश्यकता है। पत्रकारिता का मूल तत्त्व वेदना और संवेदना ही है, जिससे साहित्य का विकास हुआ है। पूर्व के साहित्यकार पत्रकार भी थे, किंतु आज के पत्रकार साहित्यकार होने का दंभ करते हैं। सत्र का संचालन डॉ दिव्या प्रसाद ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, कर्नाटक से पधारी विशिष्ट अतिथि प्रो. अमर ज्योति ने हिंदी के विकास में पत्रकारिता के विशिष्ट योगदानों को रेखांकित किया। डॉ. ललित कुमार सिंह (महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय) ने कहा कि पत्रकारिता ने समाज से कुरीतियों और अंधविश्वासों को दूर करने में महती भूमिका निभाई है। भारत माता कॉलेज, केरल की डॉ. कला ए. ने कहा कि पत्रकारिता संस्कृति का संरक्षण, साहित्यिक मूल्यांकन, राष्ट्रीय भावोन्मेष में वृद्धि कर पाठकों को जागरूक बनाती है। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. श्रुति ने संस्कृति और राष्ट्रीयता के विस्तार में पत्रकारिता की भूमिका रेखांकित की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो राज्यश्री शुक्ल ने कहा कि वंदे मातरम् की जननी बंग भूमि है। पत्रकारिता को मानव मूल्यों तथा सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य चिंतन पर आधारित होना चाहिए। सत्र का कुशल संचालन किया डॉ. बिक्रम कुमार साव ने। तृतीय तकनीकी सत्र की विशिष्ट वक्ता डॉ. रमिता गुरव ने गोवा की भाषाई अस्मिता निर्माण में मराठी ‘ब्रह्मास्त्र’ पत्र की भूमिका के संबंध में अपनी बात रखी। डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, आसनसोल गर्ल्स कॉलेज ने वर्तमान समय में ई – साहित्यिक पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया। प्रो. गौरव तिवारी (बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उत्तर प्रदेश) ने अज्ञेय की पत्रकारिता पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। सागर विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश के डॉ. आशीष द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता में पूर्वाग्रह, राजनीतिक आग्रह बहुत खतरनाक है। सत्राध्यक्ष प्रो. स्मिता मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता का भविष्योन्मुख होना अत्यन्त आवश्यक है। तकनीकी दौर में भी पत्रकारिता और साहित्य में आवाजाही जरूरी है। सत्र का कुशल संचालन डॉ. दीक्षा गुप्ता ने किया।
द्वितीय दिवस के पाँच समानांतर सत्रों में देश के विभिन्न हिस्सों के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों से पधारे हिंदी प्राध्यापकों डॉ. प्रेमसुन्दरी, डॉ. सुनील मिश्र, डॉ. कुमार गौरव मिश्रा, डॉ. तात्याराव सूर्यवंशी, डॉ. अम्बर चौधरी, डॉ. नन्दकिशोर पटेल, डॉ. सपना पेळपकर, जयकृष्ण त्रिपाठी, डॉ. मृत्युंजय पाण्डेय, डॉ. बिभा कुमारी, डॉ. मीना राठौर, डॉ. रीता चौधरी, डॉ. शैलजा, सुविधा सुरेश गांवकर, अर्चना गायतोंडे, ममता वर्लेकर, दिव्या गुप्ता, प्रीतम रजक, सची सतीश नायक, बिक्रम साव, डॉ. शम्भूराम, डॉ. विजया शर्मा ठक्कर, डॉ. हरेन्द्र सिन्हा, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. प्रवीण यादव, डॉ. कुंदन प्रसाद, डॉ. रेखा त्रिपाठी, डॉ. गिरिजा शर्मा, लिली साह, डॉ. रेनू गुप्ता, सुरेश प्रजापति, दीपाली सुतार, बिजय रजक, हर्ष साव, रविशंकर सिंह सहित अनेक शोधार्थियों ने अपने प्रपत्र प्रस्तुत किए। प्रो. अनिता सिंह, जवाहरलाल नेहरु स्मारक महाविद्यालय, डॉ. जोतिमय बाग, देशबंधु महाविद्यालय, डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी, शिवपुर दीनबंधु इंस्टीट्यूशन कॉलेज; डॉ. शबाना हबीब, राजकीय महिला महाविद्यालय, केरलम, डॉ. विवेक सिंह, कशी हिन्दू वि.वि., प्रो. राजेश पासवान, जेएनयू, डॉ किरण सिंह, मुंबई, प्रो. मुकेश मिरोठा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने उक्त समानांतर सत्रों के अध्यक्ष मंडल में रहे। सत्र संचालन डॉ. अमर दीप साव, डॉ. राम प्रवेश रजक और परमजीत पंडित ने किया।
‘उदन्त मार्तण्ड’ केन्द्रित समापन सत्र में सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। सार्क जर्नलिस्ट फोरम की अंतरराष्ट्रीय सदस्य प्रो. स्मिता मिश्र ने फोरम के उद्देश्यों पर अपनी बात रखी। विशिष्ट अतिथि श्री रूद्र सुवेदी, नेपाल ने नेपाली की पत्रकारिता के विकास में हिंदी के योगदान की चर्चा की। सार्क जर्नलिस्ट फोरम की ओर से शैलेश साह कानु, चंदन महतो, सत्येंद्र साह और विप्लव विकास को स्मृति सम्मान तथा रुद्र सुवेदी, मो. शादाब, युवराज पाण्डेय, प्रो. स्मिता मिश्रा, प्रो संजीव कुमार दुबे, प्रो. राजेश पासवान, प्रो. शंभूनाथ तिवारी, शशिभूषण सिंह, अज़मत अली सिद्दीकी, अमर खड़का को उदंत मार्तंड शिखर सम्मान प्रदान किया गया। अध्यक्षता प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने की। संयोजिका प्रो. सत्या उपाध्याय ने दो दिवसीय कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, भारतीय हिंदी परिषद के महासचिव प्रो. संजीव कुमार दुबे ने आभार ज्ञापन किया और संचालन किया सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध सुधांशु ने। प्रथम दिवस की संध्या सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मी एवं शोधार्थियों की मुख्य भूमिका रही।

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