April 23, 2026

कविता

नई पीढ़ी से मेरी ये गुज़ारिश है

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से। तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से। कि...

निहाल सिंह की पांच कविताएं

1. शीर्षक - पुस्तकालय पुस्तकालय की अलमारियों में रखी हुई है किताबें मोटी-मोटी बच्चें पन्ने उथल रहें है ढूंढ रहें...