July 23, 2026

अमृतकाल में साहित्य उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया।

उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं।मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।

आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

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