May 3, 2026
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​अनाया स्टेज के नीचे थी, उसके घुंघराले बाल आज भी बहुत सुंदर लग रहे थे। सूरज को समझ ही नहीं आ रहा था कि कहाँ पर गलती हुई है।
​पूजा और अनाया दोनों बचपन की सहेलियाँ होने के साथ-साथ पड़ोसी भी थीं। हर पल साथ रहना दोनों की आदत बन चुकी थी। पूजा और अनाया ने स्कूल तो साथ में पढ़ा ही था, अब कॉलेज भी साथ में कर रही थीं। जैसे ही दोनों सेकंड ईयर में पहुँचीं, उनकी एक सहपाठी आरती की शादी तय हो गई। आरती का घर शहर से बाहर था, इसलिए शादी में जाना दोनों के लिए एक ख्वाब जैसा था। फिर भी उन्होंने सोचा कि क्यों न घर वालों को मनाने की कोशिश करें; शायद वे मान जाएँ, वैसे भी उनके ग्रुप में यह पहली शादी थी।
​थोड़ी कोशिश के बाद पूजा और अनाया ने अपने परिवार वालों को मना लिया, लेकिन दोनों को थोड़ा अचरज भी हुआ कि वे इतनी आसानी से मान कैसे गए। सुबह पूजा की माँ ने पूछा, “आरती की शादी कब है?” पूजा ने उत्तर दिया, “20 जून को”। माँ ने कहा, “अभि भी तुम दोनों के साथ जाएगा, इतनी दूर लड़कियों का अकेला जाना ठीक नहीं है”। पूजा ने कहा, “ठीक है माँ, हमें जाने मिल रहा है, इससे खुशी की और क्या बात हो सकती है”।
​जून का महीना शुरू हो गया और साथ ही पूजा और अनाया की शॉपिंग भी। शादी के तीन दिनों के लिए दोनों ने बहुत शॉपिंग की और अब वहाँ जाने की खुशी दोगुनी हो चुकी थी। वे पहली बार इतनी दूर एक साथ सफर करने वाली थीं। 18 जून की सुबह ट्रेन से जाना था और वह दिन भी आ गया। पूजा और अनाया की माँ ने रास्ते के लिए ढेर सारा खाना तैयार कर दिया और साथ ही ढेर सारी सलाह भी दीं। ट्रेन का सफर शुरू हुआ; दोनों को बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन अभि बोर हो रहा था और सोच रहा था कि ये तीन दिन कैसे बीतेंगे।
​सफर खत्म हुआ और अब पूजा, अनाया और अभि, आरती के घर पहुँच चुके थे। घर के अंदर घुसते ही आरती की दादी मिलीं, जो काफी बुजुर्ग थीं। दादी ने दोनों को ध्यान से देखा और बोलीं, “मैं तुम दोनों को पहचान नहीं पा रही हूँ, और ये क्या पहन रखा है लड़कों के कपड़े? लड़कियाँ तो सलवार-सूट में ही सुंदर लगती हैं”। तभी आरती की माँ आईं और बोलीं, “अम्मा की बातों पर ध्यान मत दो, आओ अंदर जल्दी से तैयार हो जाओ, भूख लग रही होगी”।
​अनाया और पूजा की आँखें आरती को ढूँढ रही थीं। तभी आरती की माँ ने कहा, “आरती अंदर है बेटा, अभी रस्में शुरू हो जाएँगी इसलिए वह आराम कर रही है”। खाना खाने के बाद जब वे आरती से मिलीं, तो उसे शरमाते देख पूछा, “अरेंज मैरिज है या लव?” आरती ने शर्माते हुए कहा, “लव मैरिज।” दोनों ने आश्चर्य से पूछा, “इस सीधी-सादी लड़की को किसने अपने जाल में फाँस लिया?” आरती ने बताया, “बुआ के बेटे की शादी में मिली थी, वहीं हमें प्यार हुआ। अभिनव अपने घर में बड़ा लड़का है”। जब अभिनव के घर वालों को पता चला, तो वे रिश्ता लेकर आ गए। पूजा और अनाया खुश होकर बोलीं, “तेरी किस्मत बहुत अच्छी है, जिसे प्यार और परिवार साथ-साथ मिल गए”।
​शादी की रस्मों को देखकर दोनों अपने लिए सपने सजा रही थीं। जब आरती दुल्हन बनी, तो लाल जोड़े में वह बहुत जंच रही थी। उसे देखकर पूजा ने अनाया से कहा, “इस पल का इंतज़ार शायद हर लड़की करती होगी”। अनाया ने बस हाँ में सिर हिला दिया। तभी पीछे से अभि ने आवाज दी, “पूजा दी, पापा का कॉल आया है”। पूजा बात करने चली गई। अभि ने अनाया से कहा, “दीदी, कल सुबह यहाँ से जल्दी निकलना पड़ेगा, स्टेशन पर कोई मिलने आने वाला है”। पूजा ने भी आकर यही बात अनाया से कही और शादी खत्म होते ही दोनों अपना सामान समेटकर सोने चली गईं।
​अनाया को बार-बार करवट बदलते देख पूजा ने पूछा, “क्यों, नींद नहीं आ रही?” अनाया ने कहा, “हाँ, आरती की विदाई के बाद घर में जो सूनापन छा गया है और अंकल-आंटी का मुरझाया चेहरा देखकर मुझे अपने माँ-पापा की बहुत याद आ रही है”। पूजा ने कहा, “ज़्यादा मत सोच, उदय है ना, तेरे जाने के बाद वह अंकल-आंटी का ख्याल रखेगा। अब सो जा, कल सुबह जल्दी जाना है वरना पापा की डाँट पड़ेगी”।
​अगले दिन सुबह जैसे ही वे स्टेशन पहुँचे, पूजा के पापा का फोन आया और उन्होंने बताया कि वे कहाँ मिलेंगे। वहाँ पहुँचे तो एक अंकल उन्हें देखकर मुस्कुरा रहे थे। तीनों ने उन्हें प्रणाम किया। अंकल ने पूछा, “तुममें से पूजा कौन है?” अभि ने अपनी बहन की तरफ इशारा किया और कहा, “अंकल अब हम चलते हैं, ट्रेन का समय हो गया है।” तभी अंकल ने कहा, “रुको थोड़ी देर, सूरज आ रहा है। मेरी अभी उससे बात हुई है”।
​सूरज जैसे ही आया, उसकी नज़र अनाया पर टिक गई। अनाया भी समझ गई थी कि सूरज उसे देख रहा है। इस बीच सूरज के पिता ने पूजा की तरफ इशारा करते हुए कहा, “सूरज, यह पूजा है”। लेकिन जब दिमाग कहीं और हो तो वही नज़र आता है; सूरज अब भी अनाया को ही देख रहा था।
​ट्रेन आई और तीनों वहाँ से निकल गए। तभी पूजा के पापा का फोन आया। पूजा ने जैसे ही फोन उठाया, पिताजी ने कहा, “मैंने तुम्हें पहले बताना उचित नहीं समझा था, वह लड़का तुम्हें देखने आया था और उसने तुम्हें पसंद भी कर लिया है। घर आओगी तो बाकी बात करेंगे”। घर पहुँचते ही पूजा ने गुस्से में कहा, “आप लोग मेरे लिए लड़का देख रहे हैं और मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा?” पिताजी ने कहा, “सूरज अच्छा लड़का है, उसके पिता मेरे बचपन के दोस्त हैं”। पूजा बिना कुछ बोले अंदर चली गई, लेकिन अनाया ने उसे समझाया, “लड़का दिखने में अच्छा है और कौन सा तेरी शादी अभी हो रही है, अंकल बोल तो रहे हैं कि पढ़ाई खत्म होने के बाद करेंगे”।
​पूजा ने अब ‘हाँ’ कर दी, लेकिन अब उसका कभी-कभी सूरज से बात करने का मन होता था। पूजा के पास एक की-पैड मोबाइल था। करीब तीन महीने बाद सूरज के मामा का लड़का, अंकित, बिजनेस के काम से पूजा के शहर आया। पूजा के पिता उसे ज़िद करके घर ले आए। अगले दिन जैसे ही पूजा कॉलेज के लिए निकली, अंकित ने उसे एक पर्ची दी और कहा, “सूरज ने देने को कहा था”। पर्ची खोलने पर उसमें एक मोबाइल नंबर था। शाम को पूजा ने हिम्मत करके कॉल किया। जैसे ही सूरज ने ‘हेलो’ कहा, पूजा के दिल की धड़कन बढ़ गई और वह कुछ बोल नहीं पाई।
​अगले दिन फिर उसी नंबर से कॉल आया। उस समय अनाया साथ थी। पूजा शरमाते हुए बोली, “यह सूरज का नंबर है।” अनाया ने कहा, “जल्दी फोन उठा ना, मैं भी तो सुनूँ स्मार्ट जीजू की आवाज़!” पूजा ने फोन उठाया तो सूरज ने कहा, “मुझे पता है तुम अब भी शर्मा रही हो। मैं उसी दिन देखकर समझ गया था कि तुम बहुत सीधी और शर्मीली लड़की हो, इसी वजह से पहली नज़र में दिल दे बैठा”। सूरज ने आगे पूछा, “मैं जानना चाहता हूँ कि मैं तुम्हें पसंद हूँ या नहीं?” पूजा ने झट से कहा, “हाँ, पसंद हो।” सूरज ने मज़ाक में पूछा, “तो कब बारात लेकर आऊँ?” पूजा बोली, “दो साल बाद।” सूरज ने कहा, “इतना लंबा समय क्यों? पढ़ाई तो यहाँ भी हो जाएगी”।
​अब दोनों की बातें रोज़ होने लगीं। वे एक-दूसरे की पसंद-नापसंद जान चुके थे। पूजा के पापा ने पूछा, “क्या इसी साल शादी कर दें? सूरज के पिता का फोन आया था”। उन्होंने कहा कि आगे की पढ़ाई तुम वहाँ कर सकती हो और अगले महीने की पहली तारीख को सगाई कर देते हैं। पूजा ने तुरंत ‘हाँ’ कह दी। जब दोनों पिताओं की बात हुई, तो तय हुआ कि सगाई और शादी साथ में ही करेंगे क्योंकि दूरी बहुत है।
​अगले महीने दिसंबर में शादी तय हुई। पूजा और अनाया शॉपिंग में लग गईं। अनाया अपनी सहेली की शादी में कोई कमी नहीं चाहती थी और सारा काम मन लगाकर कर रही थी। शादी के एक दिन पहले सभी मेहमान आयोजन स्थल पर पहुँच गए। शाम को सूरज ने पूजा को कॉल किया और कहा, “मैं तुम्हारे शहर पहुँच चुका हूँ।” पूजा ने कहा, “कल जब मैं दुल्हन बनूँगी, तो सबसे पहले आपको कॉल करूँगी”।
​अगले दिन तैयार होकर पूजा ने दर्पण में देखते हुए अनाया से पूछा, “मैं कैसी लग रही हूँ?” अनाया ने हँसते हुए कहा, “आज तो सबकी नज़र तुम पर होगी, जीजू का क्या हाल होगा, यह सोच रही हूँ”। पूजा ने सूरज को कॉल किया। सूरज ने कहा, “मैं तुम्हारे कॉल का ही इंतज़ार कर रहा था। मेरी दुल्हन तैयार हो गई? उस दिन के बाद आज तुम्हें देखने का मौका मिलेगा। तुम उस दिन कितनी खूबसूरत लग रही थी, तुम्हारे कर्ली बाल मुझे बहुत पसंद आए थे”।
​यह सुनकर पूजा की आँखों से आँसू बहने लगे। उसे अहसास हुआ कि सूरज ने अनाया को ही पूजा समझ लिया था। इससे पहले कि वह कुछ कहती, बुआ अंदर आईं और फोन छीनकर बोलीं, “चलो, अब मंडप में ही बात करना”। अनाया ने पूछना चाहा कि क्या हुआ, पर उसे मौका नहीं मिला। अब पूजा को अनाया का साथ चलना भी अच्छा नहीं लग रहा था।
​स्टेज पर जैसे ही दूल्हा-दुल्हन की एंट्री हुई, सूरज ने पूजा को देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह बेचैनी से उस लड़की को ढूँढने लगा जिससे उसे प्यार हुआ था। अनाया स्टेज के नीचे थी और उसके घुंघराले बाल आज भी सुंदर लग रहे थे। सूरज को समझ नहीं आ रहा था कि गलती कहाँ हुई। पूजा के पास पहुँचकर वह बस इतना बोल पाया, “दिल में कोई और था, पर ज़ुबान पर तुम थीं”। पूजा की आँखें उसका दर्द बयां कर रही थीं। वह बस यही सोच रही थी, “यह कैसा गठबंधन है हमारा?”
​गठबंधन (भाग-2)
​शादी के मंडप तक सूरज का ध्यान अनाया पर ही था। उसने पूजा की तरफ देखा भी नहीं। पूजा सोच रही थी कि भगवान उसे किस बात की सज़ा दे रहे हैं। उसकी आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे। लोगों को लगा कि वह विदाई के गम में रो रही है। सूरज को यह सब एक बुरा सपना लग रहा था। दोनों के चेहरों पर मायूसी थी, पर अब वे शादी से इनकार नहीं कर सकते थे।
​अनाया इन सब बातों से अनजान शादी में नाच-गा रही थी। उसने अपना पसंदीदा गुलाबी रंग का लहंगा पहना था और बहुत खूबसूरत लग रही थी। जब वह पूजा के पास बैठी, तो पूजा को उससे चिढ़ होने लगी; वह अब अनाया को अपनी स्थिति का ज़िम्मेदार मान रही थी। सूरज का मन हुआ कि सब कुछ बता दे, पर अब कोई मतलब नहीं था।
​इसी कश्मकश में शादी हो गई और पूजा सूरज के घर आ गई। सूरज दूसरे शहर में काम करता था। उसकी माँ चाहती थी कि नई बहू साल भर वहीं रहे। सूरज ने कहा, “जैसा आप सही समझें, पर पूजा से भी पूछ लें”। सात दिन बीत गए, पर सूरज और पूजा के बीच कोई बात नहीं हुई, सिर्फ एक अजीब सी खामोशी थी।
​सूरज वापस चला गया। एक हफ्ते बाद पूजा ने उसे फोन किया और कहा, “हम पहले की तरह फोन पर तो बात कर सकते हैं”। बातें फिर शुरू हुईं, पर सूरज को पहले जैसा सुकून नहीं मिलता था। छह महीने बाद जब सूरज घर आया, तो उसने पूजा से कहा, “जो कुछ हुआ उसमें मेरी गलती थी। मैंने तुम्हारे सपने तोड़े और तुम्हें दुख दिया। अब मैं तुम्हें खुश रखने की पूरी कोशिश करूँगा”। पूजा को पहली बार खुशी महसूस हुई। पर वह अब भी सूरज की आँखों में अनाया के लिए जगह देख सकती थी।
​अगले दिन सूरज पूजा को अपने साथ ले गया। पूजा ने अपने नए घर को बहुत अरमानों से सजाया। सूरज को नीला रंग पसंद था, इसलिए उसने हर चीज़ नीली रखी। सूरज यह सब देखकर खुश होता था, पर उसे हमेशा लगता कि वह पूजा को उतना प्यार कभी नहीं कर पाएगा जितना पूजा उससे करती है।
​अनाया से पूजा की रोज़ बात होती थी, पर अब पूजा के मन में एक डर रहता था। वह सूरज के सामने कभी अनाया का नाम नहीं लेती थी। शादी के दो साल बीत गए, पर पूजा को जीवन में अब भी खालीपन महसूस होता था।
​एक शाम सूरज जल्दी घर आया और बोला, “चलो कहीं घूमने चलते हैं। तुम आज गुलाबी ड्रेस पहनना, बाल खुले रखना और इन रोलर्स से उन्हें घुंघराले बना लेना”। पूजा यह सुनकर बहुत दुखी हो गई। उसे अहसास हुआ कि सूरज अब भी अनाया को नहीं भूल पाया है। वह गुस्से में बोली, “मैंने आपकी खुशी के लिए सब कुछ किया, पर मैं किसी और की तरह नहीं बन सकती। मैं पूजा हूँ, अनाया नहीं!” सूरज को अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ और उसने भी गुस्से में कहा, “मैं एक अच्छी ज़िंदगी जीने की कोशिश तो कर रहा हूँ, अगर मैं उसे भूल नहीं पा रहा तो क्या करूँ?”
​पूजा कमरे में जाकर रोने लगी। तभी अनाया का कॉल आया। पूजा ने गुस्से में अपना फोन दीवार पर दे मारा। अनाया उसी शहर में थी और पूजा को सरप्राइज देना चाहती थी। उसने सूरज को कॉल करके घर का पता पूछा। जब अनाया घर पहुँची और डोरबेल बजाई, तो पूजा उसे देखकर दंग रह गई। अनाया ने गले लगते हुए पूछा, “क्या बात है पूजा, तुम मुझे देखकर खुश नहीं हुई?” पूजा ने चिढ़कर पूछा, “तुम्हारी इनसे (सूरज से) कब से बात होने लगी?” अनाया ने बताया कि यह पहली बार था क्योंकि पूजा फोन नहीं उठा रही थी।
​जब सूरज बाहर आया और उसकी नज़र अनाया पर पड़ी, तो वह कुछ बोल नहीं पाया। पूजा की नज़र सूरज पर ही थी। साथ में घूमते-फिरते पूजा के मन में एक बेचैनी रहती थी। जब अनाया के जाने का समय आया, तो उसने पूजा से पूछा, “कुछ हुआ है क्या, जो तुम मुझसे छुपा रही हो?” रात में गार्डन के झूले पर बैठे हुए पूजा, अनाया के गले लगकर रोने लगी और उसे सब कुछ बता दिया।
​अगले दिन अनाया वहाँ से चली तो गई, पर वह खुद को गुनहगार समझ रही थी। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी वजह से उसकी सबसे अच्छी सहेली के जीवन में ऐसी आग लग जाएगी।
​लेखक: एडवोकेट वेणु वर्मा

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