गोंडवाना का साही वैभव
क्या आप जानते हैं? गोंडवाना की धरती पर एक ऐसी रानी हुईं जिन्होंने ताज और राजनीति दोनों संभाली…
1977 में जब महिलाएं विधानसभा में गिनी-चुनी थीं, तब उन्होंने रामराज्य परिषद से कवर्धा सीट जीतकर इतिहास रच दिया। 1977-1980 तक जनता की आवाज़ बनीं। राजमाता शशि प्रभा देवी (1941-2020) कवर्धा रियासत की शान, छत्तीसगढ़ की पहली महिला जन-नेताओं में से एक।
महारानी साहिबा जी, वर्तमान राजा योगेश्वर राज सिंह जी माता जी हैं इनको 1980 मे कांग्रेस मे लाने वाले महाराजा शिवेंद्र बहादुर सिंह जी जिन्होंने इन्हे कांग्रेस से टिकिट दिलवाया था उसी समय इनके साथ खैरागढ़ की रानी रानी रश्मिदेवी सिंह जी एवं रानी गीता देवी जी डोंगरगांव से टिकिट मिला था l तत्कालीन सांसद राजनांदगाव महाराजा शिवेंद्र बहादुर सिंह जी उस दशक मे तुती बोलती थी राजनांदगाव से लेकर दिल्ली तक, क्योंकि उनके बाल सखा तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी थे l
राजगोड़ो की राजनीति को दो भागो में कांग्रेस कि दिग्विजय सिंह ने राजनीति कि तहत विभाजित किया इन्होंने गोंडो कि प्रभाव बाली राजनीति को मध्यप्रदेश और छत्तीशगढ़ को दो भागो में अलग किया जिससे गोंड दो भागो में विभाजित हुए, और जिले विभाजन भी राजनीति क्षणयन्त्र की तरह विभाजित किए जिससे राजगोंड बाहुल्य संख्या में ना हो जाये और यही वजह थी राजनीति कमजोर हो गयी. क्योंकि जहाँ गोंड नेता थे वो विधानसभा कि बाहुल्य गोंड आधे क्षेत्र दूसरी विधानसभा में जोड़ दी जिससे जो इनके गोंड कार्यकर्ता थे वो आधे मध्य प्रदेश में आ गए और और विधानसभा में अल्पसंख्यक बन कर रह गए। सीएम की लाइन में राजा नरेश चंद्र जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञ थे। यही डर था इन्होने मध्यप्रदेश को दो भागो में बांटा मगर उत्तर प्रदेश को विभाजित नहीं किया क्योंकि इनकी राजनीति को टक्कर देने वाला कोई समुदाय इतना राजनीति नहीं जानता था।
गोंडवाना बाहुल्य नागपुर को गोंडो की बाहुल्यता देख इन्होने पहले ही अलग कर दिया था। हमें नहीं चाहिए गोंडवाना पहले नागपुर, छत्तीशगढ़, मध्यप्रदेश एक करो फिर हम आपको बताएँगे राजगोंड राजनीति क्या होती है. हम खुद गोंडवाना क्षेत्र घोषित कर देंगे क्योंकि सभी बाहुबली गोंड एक हो जायेंगे जो अभी अन्य प्रदेध में बाँट दिए गए है।
शाही विरासत से लोकतंत्र तक का सफर… कमेंट में बताएं क्या आप इनके बारे में पहले से जानते थे? ⬇️
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