August 23, 2026

बंगाल में थीं कभी छत्तीसगढ़ की रियासतें …

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1905 के प्रशासनिक पुनर्गठन की एक ऐतिहासिक कहानी
छत्तीसगढ़ का इतिहास केवल वर्तमान भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। आज जिन क्षेत्रों को हम छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा मानते हैं, उनका अतीत अनेक प्रशासनिक सीमाओं, राजनीतिक शक्तियों और औपनिवेशिक पुनर्गठनों से होकर गुजरा है। इसी इतिहास का एक रोचक अध्याय उन पाँच रियासतों से जुड़ा है, जो कभी बंगाल प्रशासन के अधीन थीं और वर्ष 1905 में प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद मध्य प्रांतों में आ गईं।
ये रियासतें थीं—सरगुजा, जशपुर, कोरिया, उदयपुर और चांगभखार। इनका संबंध ऐतिहासिक रूप से छोटानागपुर की देशी रियासतों से था और ब्रिटिश काल में इन पर बंगाल सरकार के माध्यम से प्रशासनिक-राजनीतिक नियंत्रण स्थापित था। 1905 में बंगाल के पुनर्गठन के दौरान इन पाँच हिंदीभाषी रियासतों को बंगाल से निकालकर Central Provinces में स्थानांतरित कर दिया गया।
छोटानागपुर से छत्तीसगढ़ तक
ब्रिटिश काल में छोटानागपुर केवल आज के झारखंड तक सीमित प्रशासनिक अवधारणा नहीं था। इसके अंतर्गत अनेक देशी रियासतें थीं, जिनमें सरगुजा, जशपुर, कोरिया, उदयपुर और चांगभखार भी शामिल थीं। ऐतिहासिक अभिलेखों में इन्हें Chota Nagpur Tributary States के रूप में वर्णित किया गया है।
1905 से पहले इन पाँचों रियासतों का प्रशासनिक संबंध बंगाल सरकार से था। उपलब्ध औपनिवेशिक अभिलेखों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि 1905 में सरगुजा सहित जशपुर, उदयपुर, कोरिया और चांगभखार को बंगाल से Central Provinces में स्थानांतरित किया गया।
यह परिवर्तन केवल नक्शे पर सीमा बदलने की घटना नहीं थी। इसके पीछे ब्रिटिश सरकार की व्यापक प्रशासनिक नीति काम कर रही थी, जिसमें भाषाई, भौगोलिक और प्रशासनिक सुविधा के आधार पर प्रदेशों और रियासतों के प्रशासनिक संबंधों को पुनर्गठित किया जा रहा था।
1905 : बंगाल विभाजन और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
1905 का वर्ष भारतीय इतिहास में बंगाल विभाजन के लिए प्रसिद्ध है। लॉर्ड कर्जन की सरकार ने विशाल बंगाल प्रांत का पुनर्गठन किया। 16 अक्टूबर 1905 से यह विभाजन प्रभावी हुआ और पूर्वी बंगाल एवं असम नामक नया प्रांत अस्तित्व में आया।
इसी व्यापक पुनर्गठन के दौरान केवल बंगाल के जिलों का ही स्थानांतरण नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न देशी रियासतों को भी एक प्रशासन से दूसरे प्रशासन के अधीन किया गया।
इस पुनर्गठन में एक ओर मध्य प्रांतों से संबलपुर तथा बामड़ा, रायरखोल, सोनपुर, पटना और कालाहांडी जैसी रियासतें बंगाल में गईं; दूसरी ओर चांगभखार, कोरिया, सरगुजा, उदयपुर और जशपुर बंगाल से Central Provinces में आ गईं।
इस प्रकार 1905 का पुनर्गठन दोतरफा प्रशासनिक अदला-बदली का भी उदाहरण था।
पाँच रियासतें कौन-सी थीं?
इन पाँच रियासतों की ऐतिहासिक पहचान को संक्षेप में इस प्रकार समझा जा सकता है—
सरगुजा — क्षेत्रफल और ऐतिहासिक महत्त्व की दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण रियासतों में थी। ब्रिटिश अभिलेखों में इसका उल्लेख Chota Nagpur क्षेत्र की रियासत के रूप में मिलता है।
जशपुर — जशपुर भी छोटानागपुर की हिंदीभाषी रियासतों में शामिल था और 1905 में बंगाल से Central Provinces में स्थानांतरित हुआ।
कोरिया — वर्तमान कोरिया और उसके आसपास का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कोरिया रियासत के रूप में जाना जाता था। इसका प्रशासनिक संबंध भी बंगाल से था, जिसे 1905 में बदल दिया गया।
उदयपुर — यहाँ ध्यान रखना आवश्यक है कि यह राजस्थान के प्रसिद्ध मेवाड़ वाले उदयपुर से अलग रियासत थी। ऐतिहासिक संदर्भों में इसे छत्तीसगढ़ क्षेत्र की उदयपुर रियासत के रूप में पहचानना चाहिए।
चांगभखार — वर्तमान उत्तर छत्तीसगढ़ से जुड़ी यह रियासत भी छोटानागपुर की उन पाँच रियासतों में थी जिन्हें 1905 में बंगाल से Central Provinces में स्थानांतरित किया गया। औपनिवेशिक अभिलेखों में इसके प्रशासनिक हस्तांतरण के लिए बाकायदा सनद का उल्लेख मिलता है।
यह केवल सीमा परिवर्तन नहीं था
1905 के बाद इन पाँच रियासतों का प्रशासनिक संबंध छत्तीसगढ़ संभाग से जुड़ गया। एक शोध-अभिलेख में भी उल्लेख है कि उदयपुर, जशपुर, सरगुजा, कोरिया और चांगभखार 1854 से 1905 तक बंगाल के छोटानागपुर डिवीजन के आयुक्त के नियंत्रण में थे और 1905 के बाद इन्हें छत्तीसगढ़ डिवीजन के आयुक्त के अधीन कर दिया गया।
इस दृष्टि से 1905 का वर्ष छत्तीसगढ़ के राजनीतिक-प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है।
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 1905 के स्थानांतरण के बाद Central Provinces में छत्तीसगढ़ क्षेत्र से संबंधित रियासतों का समूह अधिक विस्तृत हो गया। इसी पृष्ठभूमि में आगे चलकर छत्तीसगढ़ की 14 रियासतों की ऐतिहासिक संरचना का उल्लेख मिलता है।
रियासतें थीं, लेकिन आधुनिक छत्तीसगढ़ नहीं था
यहाँ इतिहास को समझने में एक सावधानी आवश्यक है। उस समय “छत्तीसगढ़” आज के राज्य के अर्थ में कोई पृथक राज्य नहीं था। ब्रिटिश भारत में छत्तीसगढ़ एक प्रशासनिक संभाग के रूप में Central Provinces का हिस्सा था।
इसलिए यह कहना कि “1905 में बंगाल से छत्तीसगढ़ राज्य में पाँच रियासतें आईं” ऐतिहासिक रूप से थोड़ा भ्रामक होगा। अधिक सटीक कथन यह होगा कि—
“1905 में बंगाल सरकार के अधीन छोटानागपुर की पाँच हिंदीभाषी देशी रियासतें—सरगुजा, जशपुर, कोरिया, उदयपुर और चांगभखार—Central Provinces के छत्तीसगढ़ संभाग के प्रशासनिक क्षेत्र में स्थानांतरित की गईं।”
यही तथ्य इतिहास की दृष्टि से अधिक प्रमाणिक है।
1905 के बाद बनी नई ऐतिहासिक कड़ी
इन रियासतों के छत्तीसगढ़ संभाग से जुड़ने के बाद उत्तर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास को एक नया स्वरूप मिला। सरगुजा, जशपुर, कोरिया, उदयपुर और चांगभखार की भौगोलिक निकटता, भाषाई समानता और सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों ने उन्हें छत्तीसगढ़ की व्यापक ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
औपनिवेशिक दस्तावेज यह भी बताते हैं कि 23 दिसंबर 1905 को इन रियासतों के शासकों से संबंधित नई सनदें जारी की गईं, जिनमें बंगाल सरकार से Central Provinces प्रशासन में उनके स्थानांतरण के बाद उनकी स्थिति और अधिकारों को परिभाषित किया गया था। चांगभखार, कोरिया, जशपुर, सरगुजा और उदयपुर—पाँचों के लिए ऐसी सनदों का अभिलेख मिलता है।
यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि यह परिवर्तन महज नक्शे में रेखा खींच देने जैसा नहीं था, बल्कि रियासतों की प्रशासनिक स्थिति को औपचारिक रूप से पुनर्परिभाषित किया गया था।
1930 के दशक में फिर बदला प्रशासनिक ढाँचा
इतिहास यहीं नहीं रुका। आगे चलकर इन रियासतों सहित छत्तीसगढ़ क्षेत्र की देशी रियासतों के प्रशासनिक संबंधों में फिर परिवर्तन हुए। 1930 के दशक में देशी रियासतों से संबंधित ब्रिटिश राजनीतिक व्यवस्था को पुनर्गठित किया गया और इन रियासतों का संबंध प्रांतीय प्रशासन के बजाय Crown Representative की राजनीतिक व्यवस्था से अधिक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने लगा।
इससे स्पष्ट होता है कि ब्रिटिश काल में रियासतों की स्थिति स्थिर नहीं थी। उनके प्रशासनिक संबंध समय-समय पर बदलते रहे।
छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक अनदेखा अध्याय
आज जब हम छत्तीसगढ़ की रियासतों की चर्चा करते हैं तो सामान्यतः बस्तर, कांकेर, राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा, सारंगढ़, रायगढ़, सक्ती आदि के साथ सरगुजा, जशपुर और कोरिया का नाम लेते हैं। किंतु इनके पीछे छिपा हुआ प्रशासनिक इतिहास कहीं अधिक जटिल है।
कभी बंगाल के छोटानागपुर प्रशासन से जुड़े रहे ये क्षेत्र बाद में छत्तीसगढ़ संभाग से जुड़े और स्वतंत्रता के बाद भारतीय संघ तथा राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजरते हुए आधुनिक छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संरचना का हिस्सा बने।

डॉ सुधीर शर्मा

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