जिसको जितनी चाहत है …
जिसको जितनी चाहत है
उसको उतनी ही लत है
तुझे मिला या मुझे मिला
अपनी-अपनी किस्मत है
मंज़िल कब मिलती सबको
आगे बढ़ गर हिम्मत है
रस्ते वही बनाता है
जिस पर उसकी रहमत
बाधाएँ पैदा करना
हर बस्ती की आदत है
उसको मत भड़काओ तुम
अब तक तो वह संयत है
तेरी आँखों का पानी
अपनेपन की कीमत है
नफरत से नफरत बढ़ती
पैदा कर गर उल्फ़त है
डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल
7838090732