October 22, 2026

कविता

हँस रहा विध्वंस का विक्रांत है

हैं चरण,पर आचरण तो भ्रांत है, घोषणा उसकी, कि वह संभ्रांत है। धर्म का परिदृश्य, क्यों ऐसा हुआ! रक्त रंजित...

देवारी मँ बारबो माटी के दीया

विधा- सम मात्रिक छंद विधान- चार पद,प्रत्येक पद 16-16 मात्राएँ, युगल पद तुकांत, पदांत ऽऽ विकल्प ऽ।।,।।ऽ या ।।।। मान्य,...

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