March 7, 2026
bharosa-2

मैं ज़ख़्म दिल का दिखाऊँ कैसे?
कहानी ग़म की सुनाऊँ कैसे?

गले किसी को लगाऊँ कैसे?
क़सम तुम्हारी भुलाऊँ कैसे?

रक़ीब के हो गये हो तुम तो,
सबक वफ़ा का सिखाऊँ कैसे?

बनी हैं यादें ही ज़िन्दगी अब,
तो इनको दिल से मिटाऊँ कैसे?

तुम्हारे कारण हुआ हूँ रुसवा,
नज़र किसी से मिलाऊँ कैसे?

ख़ुदा नहीं तुम तुम्हारे आगे,
ये सर मैं अपना झुकाऊँ कैसे?

न तो दिवंगत हूँ औ’ न बूढ़ा,
पदक पुरस्कार पाऊँ कैसे?

दुआ की हद से भी जो परे है,
‘विजय’ उसे मैं बुलाऊँ कैसे?
विजय तिवारी, अहमदाबाद, गुजरात ( भारत)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *