May 25, 2026

चाहत में तेरी ख़ुद को…

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चाहत में तेरी ख़ुद को डुबोते चले गए
आंखों में तेरी खोए तो खोते चले गए

बस में कहां था मेरे कि मैं शायरी करूं
कुछ शेर तेरी याद में होते चले गए

मैने जो की वफ़ा तो सिला मुझको ये मिला
ता उम्र तेरी याद में रोते चले गए

ख्वाबो में तुमको देखा तो बस देखती रही
टूटे ना ख़्वाब सोए तो सोते चले गए

आंखों से ग़म तुम्हारा छलकने नहीं दिया
पलकों पे आंसुओं को पिरोते चले गए

मोनिका देहलवी

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