एस. सी. ई. आर. टी. रायपुर छत्तीसगढ में साहित्य का महाकुम्भ
साहित्य, चिंतन और सृजन का संगम :पचहत्तर के बलराम
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” भारतीय ज्ञान परंपरा और मेरा लेखन “को समर्पित कार्यक्रम
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छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी में स्थित शिक्षा के सबसे बडे केंद्र
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर का बृहदकक्ष विगत दिवस शिक्षा, समाज और संस्कृति को समर्पित रहा।। कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि वक्ता – सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार आदरणीय श्री बलराम प्रेम नारायण साहित्य अकादमी की त्रयमासिक पत्रिका के अतिथि संपादक रहे। बलराम जी लघुकथा के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं।बलराम जी का लघुकथा संग्रह”मसीहा की आँखे ” साहित्य जगत में बहुत लोकप्रिय है। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। जैसे केंद्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान, हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान, बिहार से नई धारा रचना सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा अज्ञेय पुरस्कार, मध्यप्रदेश द्वारा कथालेखन पर प्रेमचंद पुरस्कार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश शासन द्वारा साहित्यिक कृति सम्मान आदि अनेकानेक पुरस्कार और सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में एस. सी. ई. आर. टी. के अतिरिक्त संचालक श्री जयप्रकाश यथ “मानस” ने स्वागत भाषण करते हुए बलराम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन किया संस्थान से श्रीमती प्रीति सिंह व्याख्याता ने। सत्र का संचालन किया प्रोफेसर एस. के. राठौर ने।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता किया माननीय श्री शशांक शर्मा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी ने। अतिथि वक्ता के रूप में अपनी सहभागिता दी
पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्र( प्रख्यात भाषा विद्व शिक्षा विद,)
डाँ. सुशील त्रिवेदी( पूर्व आई. ए. एस, प्रख्यात लेखक एवं समीक्षक ) श्री गिरीश पंकज (प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं पत्रकार )
श्री दिवाकर मुक्तिबोध (प्रतिष्ठित पत्रकार एवं लेखक )
श्री सुभाष मिश्र (प्रतिष्ठित लेखक, रंगकर्मी व संपादक )
श्री संजय अलंग (आई. ए. एस., प्रतिष्ठित लेखक, कवि एवं इतिहासकार
श्री रामकुमार तिवारी (प्रतिष्ठित कवि एवं लेखक, बिलासपुर
श्री मुमताज़( प्रतिष्ठित शायर भिलाई )
पचहत्तर के बलराम -विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान
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सर्वप्रथम अपनी पुस्तकों एवं सम्मान पत्र भेटकर श्री जयप्रकाश मानस ने स्वागत एवं अभिनंदन किया।विभिन्न साहित्यिक एवं साँस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। तदुपरांत बलराम जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला -डाँ. सुशील त्रिवेदी,, श्री रामकुमार तिवारी, श्री गिरीश पंकज ने। पुरस्कार के इतिवृत्त पर डाँ. महेंद्र ठाकुर ने अपना वक्तव्य देते हुए इस वर्ष का डाँ. बालेन्दुशेखर तिवारी स्मृति लघुकथा पुरस्कार प्रदान किया।
मंच संचालन -डाँ सुधीर शर्मा
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तृतीय सत्र –
मंचसंचालन — नर्मदा प्रसाद मिश्र “नरम”
इस महत्वपूर्ण सत्र में विभिन्न कृतियों एवं पत्रिकाओं का विमोचन किया गया –
(1) @डाँ. रमेश तिवारी और राज शेखर चौबे द्वारा संपादित -“डाँ. महेंद्र कुमार ठाकुर -सत्य, साहस और संघर्ष का सृजन-विस्तार
(2) “नेता जी घूघट के सामने ” व्यंग्य संग्रह -डाँ. महेंद्र कुमार ठाकुर
(3″)बाँस का डिनर ” व्यंग्य संग्रह -डाँ. महेंद्र कुमार ठाकुर
पत्रिका —नारी का संबल संपादित द्वारा श्रीमती शकुंतला तरार
छत्तीसगढ़ मित्र –संपादक -डाँ. सुधीर शर्मा
लघुकथा संकलन –
(1)”बची हुई हवा ” श्री जय प्रकाश मानस
(2) “दो कतार पीछे ” -श्री जय प्रकाश मानस
श्री जय प्रकाश मानस की लघुकथाओं पर चर्चा –
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(1) श्री सुभाष मिश्र, (2) सुश्री स्तुति शर्मा( रिसर्च स्कालर ) विषय–
” जयप्रकाश मानस का व्यक्तित्व और कृतित्व”
(3) डाँ जय भारती चंद्राकर (4) डाँ. महेंद्र कुमार ठाकुर
(5)डाँ. चित्तरंजन कर (6) डाँ. महेंद्र मिश्र
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” जय प्रकाश मानस जी प्रतिष्ठित वरिष्ठ साहित्यकार हैं। इन्होने साहित्य की तमाम विधाओं में कलम चलाकर अनेक ग्रंथो का उपहार दिया है। देश -विदेश की स्तरीय पत्र -पत्रिकाओं लेखन कर एक महत्वपूर्ण नूतन अध्याय जोडा है। इन्होने रूपक, फेटेंसी, प्रतीक, संकेत और बिंब समस्त काव्यगुणों का प्रयोग किया है। मानस जी की रचनाओं का अनुवाद बांग्ला, उडिया, पंजाबी, गुजराती नेपाली में आदि में हुआ है। जहाँ इनका सृजन लीक से हटकर है, वहीँ संवादों का निर्वाह बहुत कुशलता पूर्वक हुआ है। मानस जी सांकेतिक रूप से अपनी बात कहने में दक्ष हैं। “—– नर्मदा प्रसाद मिश्र “नरम ”
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धन्यवाद – श्री बलराम
कृतज्ञता ज्ञापन -डाँ. विजय लक्ष्मी सहा. प्राध्यापक
एस. सी. ई. आर. टी.
इस गौरवमय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त विभिन्न राज्यों से विद्वानों की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।श्री त्रिलोक महावर( आई. ए. एस )श्री अजय पाठक बिलासपुर, श्री रामकुमार तिवारी,श्री रामपटवा रायपुर,श्रीमती कल्पना रथ, डाँ. अर्चना वर्मा, डाँ सीमा श्रीवास्तव, श्री गौरव शर्मा आदि