June 7, 2026
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है सुकूं का सबब मैकदे की ज़मीं
कम मगर जादु-ए-आशिकी भी नहीं

आशिकों ने जवां हुस्न को यूँ रखा
उम्र जितनी बढ़ी इश्क उतना हसीं

वक्त उन सँग गुज़ारा वो याद आ गया
मय की बूँदें लबों पर जो आके थमीं

है नशे का असर या खुदा का करम
सारी गलियाँ उसी की गली को चलीं

मुझको कहिए नज़ाकत किसी शेर में
नाम मेरा ग़ज़ल में रखें माहजबीं

बस कहे साकिया या मेरा दम भरे
हीरे – मोती से शर्तें लगाई गईं

– वर्षा शर्मा

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