June 24, 2026

समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध जनसेवक : अजय चंद्राकर

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डॉ. सुधीर शर्मा*
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि की सफलता केवल चुनावी जीत से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से आंकी जाती है कि उसने अपने क्षेत्र और समाज के विकास में कितना योगदान दिया। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अजय चंद्राकर ऐसा ही एक नाम है, जिन्होंने कुरूद विधानसभा क्षेत्र को विकास, सुशासन और जनभागीदारी की नई पहचान दी है। उनकी राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना रहा है।
“सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो।”
यह शेर अजय चंद्राकर की विकास यात्रा पर पूरी तरह सटीक बैठता है। उन्होंने चुनौतियों के बीच भी विकास की निरंतर राह चुनी और क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का प्रयास किया।
कुरूद क्षेत्र के विकास की कहानी केवल भवनों, सड़कों और पुलों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की कथा है। नगर में स्वच्छता, स्वास्थ्य और नशामुक्ति को लेकर चलाए गए अभियान इस बात के प्रमाण हैं कि विकास का अर्थ केवल भौतिक सुविधाएँ नहीं, बल्कि स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण भी है। “स्वच्छ कुरूद, स्वस्थ कुरूद, नशामुक्त कुरूद” का संदेश जनचेतना का आधार बना।
“दीये से दीया जलाते चलो,
अँधेरों को दूर भगाते चलो।”
समावेशी विकास का अर्थ है कि समाज का कोई भी वर्ग विकास की धारा से वंचित न रहे। अजय चंद्राकर ने प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। पीडब्ल्यूडी डिवीजन कार्यालय, उप-तहसील, राजस्व एवं पुलिस व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा न्यायालयीन सुविधाओं के विस्तार से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली। प्रशासन जनता के निकट पहुँचा और शासन की प्रभावशीलता बढ़ी।
किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ उसकी आधारभूत संरचना होती है। विधानसभा क्षेत्र में अनेक पुलों, सड़कों और संपर्क मार्गों का निर्माण हुआ। महानदी, खारून और अन्य नदी-नालों पर उच्च स्तरीय पुलों ने ग्रामीण क्षेत्रों को नई गति प्रदान की। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ाव ने व्यापार, कृषि और रोजगार के नए अवसर पैदा किए।
“ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।”
— अल्लामा इक़बाल
यह शेर उस आत्मविश्वास और दूरदर्शिता का प्रतीक है, जिसके बल पर कोई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र को विकास के नए मानकों तक पहुँचा सकता है।
शिक्षा के क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना ने क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के द्वार खोले। शिक्षा को विकास का आधार मानते हुए किए गए ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य निवेश सिद्ध होंगे।
अजय चंद्राकर की विशेषता यह रही कि उन्होंने विकास को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने समाज को सहभागी बनाया। स्वच्छता अभियान हो, पर्यावरण संरक्षण हो या सामाजिक जागरूकता—हर क्षेत्र में जनभागीदारी को महत्व दिया गया।
“वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था,
वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है।”
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
विकास की वास्तविक कहानी अक्सर आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों में दिखाई देती है। यही कारण है कि कुरूद क्षेत्र की पहचान आज विकासोन्मुख और प्रगतिशील क्षेत्र के रूप में स्थापित हुई है।
किसान, व्यापारी, विद्यार्थी, महिलाएँ, युवा और ग्रामीण समुदाय—सभी को विकास प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास किया गया। यही समावेशी विकास की मूल भावना है। विकास का लाभ जब समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचता है, तभी वह स्थायी और सार्थक बनता है।
“मंज़िल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।”
आज जब राजनीति में तात्कालिक लाभ और प्रचार अधिक दिखाई देता है, तब अजय चंद्राकर का विकास मॉडल यह संदेश देता है कि जनसेवा, दूरदृष्टि और सतत प्रयास से किसी भी क्षेत्र का कायाकल्प किया जा सकता है।
अंततः कहा जा सकता है कि अजय चंद्राकर ने कुरूद क्षेत्र में जो विकास कार्य किए, वे केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक नई सामाजिक चेतना के निर्माण के प्रयास हैं। उनकी कार्यशैली में विकास, सुशासन, सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। यही कारण है कि वे समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध जनसेवक के रूप में व्यापक सम्मान प्राप्त करते हैं।
“सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं।”
विकास की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती। कुरूद की विकास गाथा भी निरंतर आगे बढ़ती हुई उस जनसेवक की कहानी कहती है जिसने राजनीति को जनकल्याण का माध्यम बनाया और विकास को समाज की सामूहिक आकांक्षाओं से जोड़ा।

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