तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा…
तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा,
मगर अच्छा नहीं लगता है गुज़र जाना मेरा।
तूने पूछा ही नहीं हाल कभी दिल का मेरे,
मैंने भी कह दिया—सब ठीक है, फ़साना मेरा।
एक मुद्दत से तुझे भूलने की कोशिश में,
और हर रोज़ निकल आता है अफ़साना मेरा।
तेरे जाने से बहुत कुछ तो बदलना था मगर,
आज भी दिल में वही रहता है ठिकाना मेरा।
मैंने चाहा था तुझे भूल के जी लूँ लेकिन,
दिल ने हर बार तेरा नाम ही दोहराया मेरा।
तुझसे शिकवा भी करूँ तो किस ज़ुबाँ से आख़िर,
तू तो अपना था, सो अपना ही रहा ग़म मेरा।
कुछ तो ऐसा था तेरी आँख में, अब तक है याद,
वरना यूँ उम्र नहीं ढूँढ़ती कोई चेहरा मेरा।
अब न मिलने की शिकायत है, न बिछड़ने का मलाल,
बस कभी-कभी बहुत याद आता है होना तेरा।
ग़ज़ाला शेख़