चीनी कम
‘चीनी कम’
बहुत पहले एक फ़िल्म आई थी
पर स्क्रिप्ट तो लगता है
आज के बजट के लिए लिखी गई थी !
सच कहें तो
ये दो सफ़ेद जहर हैं ही –
एक रसोई में, एक कुर्सी पर
एक चीनी, एक नमक !
चीनी लगे या न लगे
नमक ज़रूर लगनी चाहिए
तभी तो बिना चीनी के भी
जुबान को मिठास आती है,
और किसी-किसी को तो
बिना काम के भी वाहवाही आती है !
चीनी हुई महंगी
बहुत अच्छा हुआ
वरदान ही है ,
पहले डॉक्टर कहते थे – चीनी कम करो
अब सरकार कह रही है – चीनी कम करो
देखो, कितना तालमेल है सेहत और सरकार में !
महंगाई बढ़ाने वालों को
बहुत-बहुत धन्यवाद
आपने हमारी फिक्र में ही तो
मिठाई से दूरी बढ़वाई है !
किचन का ध्यान कौन रखता है साहब
हम तो डाइनिंग टेबल वाले लोग हैं
जहाँ किचन का बजट बिगाड़ कर
देश की सेहत सुधारने का
प्रवचन परोसा जाता है !
अब तो और मज़ा आएगा
चाय फीकी होगी, पर आँकड़े मीठे होंगे
जब चीनी कम होगी, तो शुगर भी कम होगी
और जब शुगर कम होगी तो
सरकार का प्रचार और मीठा होगा !
पहले कहते थे – ‘जेब भरी तो सेहत बनी’
अब नया नारा है – ‘जेब खाली तो सेहत भली’ !
तो उठाइये फीकी चाय का प्याला
और एक-दूसरे को बधाई दीजिये !
आप सभी को ‘चीनी कम’ की
बहुत-बहुत बधाई !
— राजकुमार ‘मसखरे’