बेख़बर
तुम बेख़बर ख़बर से –
फिसल गया वक़्त
तुम्हारे हाथ से
लम्हा – लम्हा होकर
और तुम
ज़िंदगी की चौगान में
ज़िंदगी के नाम पर
उम्र जोड़ते रहे ।
तुम बेख़बर ख़बर से –
फिसल गई उम्र
तुम्हारे हाथ से
वर्ष – वर्ष होकर
और तुम
ज़िंदगी के अख़िरी पड़ाव पर
ज़िंदगी को जीने की
राह देखते रहे ।
तुम बेख़बर हर ख़बर से ।
– वनिता
©️Vanita Thakur
Nov 03,2026@11:28pm