जनकवि कोदूराम “दलित” जी की हिन्दी कविता –
"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...
"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...
साँझी लोकपर्व मुख्यतः उत्तर भारत, हरियाणा, पंजाब राजस्थान ,दिल्ली के कुछ हिस्सों में और विशेषकर ब्रज क्षेत्र में मनाया जाता...
ज़ियादा की ख़्वाहिश कब की हमने,,, मगर तुम्हें या तुमसे इतना भी यदि नहीं माँगेंगे तो जीयेंगे कैसे,,, हमारे बालों...
छत्तीसगढ़ की उर्वरा माटी ने अनेक काव्य-रत्नों को जन्म दिया है। अस्सी के दशक में छत्तीसगढ़ी साहित्य के गगन पर...
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' क्वीन्स, न्यूयार्क के पुस्तकालय में वह मुस्कराते पढ़ रही थी और मैं पूछता कि पत्रिका मेरी...
यह दोनों महान शायर और शायरा एक समय में पति पत्नी थे. 1993 या 98 में इनका तलाक हो गया....
(आलेख ; स्वराज करुण ) स्वतंत्रता हर देश का मौलिक और मानवीय अधिकार है। विशेष रूप से विगत दो शताब्दियों...
मोर संग चलव रे, वा रे मोर पँड़की मैना, धनी बिना जग लागे सुन्ना, चौरा मा गोंदा रसिया, बखरी के...
मर्द भी मासूम होते हैं चेहरा सख़्त, दिल कोमल। हँसी झूठी, आँखें गीली। बोझ भारी, कंधे थके। रातें लंबी, सपने...
हिन्दी की प्रख्यात कवि ज्योति शर्मा का यह दूसरा कविता संग्रह समकालीन कविता की नयी समृद्धि का संकेतक है।नितांत नये...