किसी की प्रशंसा…
किसी की प्रशंसा ,किसी की जलन
है दुनिया का ये तो अनोखा चलन
यहाँ तन से कपड़े उतरने लगे
कहाँ तक ये जाएगा बोलो पतन
है दुनिया बड़ी खूबसूरत मगर
मुझे सबसे प्यारा है मेरा वतन
यहाँ हर कदम पे छलावा अधिक
संभल कर बढ़ाना है अपने चरन
मिला है जनम तो करेंगे सफल
लोकमंगल में करना इसे तुम हवन
मिली जो चदरिया वो बेदाग हो
हमें करना होगा यही इक जतन
नहीं कोई नेता जो भूलेंगे हम
कहा गर तो पंकज निभाए वचन
@ गिरीश पंकज
एक पुरानी कटिंग मिली..