कविता

कविता है
जीवन पर भरोसा करने की जगह
इस उदास समय में है
कंधे पर रखा पूर्वजों का हाथ
जब झंडों के पीछे छिप जाते हैं
मंदिर और मस्जिद
हवाओं और लहरों से आती
ईश्वर की पवित्र आवाज है कविता
कविता
तेज बरसात में कार का चलता वाइपर है
रात में सियारों के हुआँ-हुआँ के बीच
अंधेरे से झांकते चाँद की मौन आशा है
बलात्कार के बाद
दांत भींचते हुए उठ खड़ी हुई भाषा है
कविता है
सुनार की तरह चुने हुए एक- एक शब्द में सुंदर
लुहार की तरह उठे हुए हथौड़े सी कठोर
वह एक खिड़की है खुली हुई
वह एक आत्मा है धुली हुई
कविता है
जटायु की तरह कंठ से निकला आखिरी गान
कटे पंख के बावजूद
एकबार और उड़ने की इच्छा
कविता है दुख में सुख में
कविता है तो भरोसा है।
–शंभुनाथ