कविता साहित्य औघड़ दानी Chhattisgarh Mitra March 22, 2023 0 शिव मेरे!! माना तुम हो औघड़ दानी मैं भी गंग धार नही न धरो मुझे सिर माथे सिरमौर बना न चाहा बनना कंठहार गान से अधिक गरल स्वरूप मैं जीवन और जह़र के मध्य साधना चाहती हूँ स्वर्ण मध्य सती बनकर साथ दो मेरा सखा बन दोगे नं!!! – पूनम Post navigation Previous: पुस्तक समीक्षा – वे लोगNext: हिंदी के इतिहास में कुछ बड़े उपन्यासों में से एक: आपका बंटी More Stories कविता साहित्य है सुकूं का सबब… Chhattisgarh Mitra June 7, 2026 0 आलेख साहित्य एससीईआरटी छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम Chhattisgarh Mitra June 3, 2026 0 आलेख साहित्य लाजवाब कृति – गांव के हो गए (हिंदकी संग्रह) Chhattisgarh Mitra June 3, 2026 0 Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.