देस में निकला होगा चाँद ….

दूरदर्शन के अत्यंत लोकप्रिय धारावाहिक ‘ महाभारत’ के पटकथा और संवाद लेखक डॉ. राही मासूम रजा को आज उनकी पुण्य तिथि पर विनम्र नमन। आधुनिक हिन्दी जगत के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और उर्दू शायर डॉ. राही मासूम रज़ा का जन्म उत्तरप्रदेश के ग्राम गंगौली (जिला -गाजीपुर ) में एक सितम्बर 1925 को हुआ था । निधन मुम्बई में 15 मार्च 1992 को हुआ ।
रज़ा साहब के लोकप्रिय उपन्यासों में ‘आधा गाँव ‘ ‘टोपी शुक्ला ‘ ‘नीम का पेड़’ और ‘ओस की बूँद ‘ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उन्होंने कई फिल्मों की पटकथाएं भी लिखीं। उन्हें फ़िल्म फेयर सम्मान भी मिला। उनके लिखे संवादों ने बी.आर.चोपड़ा द्वारा निर्मित दूरदर्शन धारावाहिक ‘महाभारत ‘ को देश और दुनिया में लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचा दिया था । राही मासूम रज़ा की एक बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल आज उनकी पुण्यतिथि के मौके उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि सहित यहाँ प्रस्तुत है—
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद
अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद
जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात
उन आँखों में आँसू का इक क़तरा होगा चाँद
रात ने ऐसा पेँच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जा कर अटका होगा चाँद
चाँद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीते
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद –
यह ग़ज़ल आप मशहूर गायक जगजीत सिंह की दिलकश आवाज़ में यूट्यूब पर भी सुन सकते हैं।
– स्वराज करुण
–स्वराज करुण