October 22, 2026

“लोकरंग के संस्थापक कलाकार दीपक चंद्राकर के जन्म दिन पर” – रीतेश देवांगन की कलम से…..

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तेल चूक गया आंधी आई लेकिन दीपक नही बुझा रे …३
एैसा पथिक चला जीवन पथ पर कभी न हारा कभी थका रे तेल चूक गया आंधी आई लेकिन दीपक नही बुझा रे ३…

यह पंक्ति छत्तीसगढ़ की कला को जीवंत रखने वाले लोक कलाकार दीपक चंद्राकर के जीवन को चरितार्थ करती है जिन्होने अपना पूरा जीवन लोककला के साधक के रूप मे अपनी अविराम यात्रा जारी किए हुए है । उनकी इस कला यात्रा मे जाने कितने रोड़े आए ,व्यक्तिगत रूप से पारिवारिक दायित्वो की भी परवाह न करते हुए वे एक छोेटे से ग्राम मे कला की साधना मे रत रहे। इसी कला प्रेम के कारण उन्हे कई बार पारिवारिक विरोधो एवं आर्थिक तंगी तक का साामना करना पड़ा किंतु वे न थके न हारे निरंतर आगे बढ़ते गए। आज न केवल उनके परिवार शुभेच्छु जन एवं पूरे नगर को उन पर गर्व है अपितु पूरा छत्तीसगढ़ दीपक चंद्राकर का नाम आज गर्व से ले रहा है।

छ ग की संस्कारधानी ग्राम अर्जुन्दा के प्रतिष्ठित परिवार मे जन्मे दीपक चंद्राकर को लोककला की सांस्कृतिक विरासत जन्म से ही मिली। पिता दाउ स्व उजियार सिंह चंद्राकर एवं काका दाउ भागवत प्रसाद चंद्राकर स्वयं ही संगीत एवं कला के पारखी एवं ममर्ज्ञ थे तात्कालीन समय मे वे प्रेमचंद के गोदान जैसै महान उपन्यास को भी मंच पर प्रस्तुत करते थे इस कड़ी मे भ्राता पृथ्वीवल्लभ ,ब्रजेश,विनय मोहन , नरेश चंद्राकर के साथ दीपक चंद्राकर ने भी अपनी छोटी सी उम्र से ही कला की बारिकियां समझने लगे एवं उस समय के प्रख्यात लोककला मंच सोनहा बिहान से जुड़कर एवं दाउ महासिंग चंद्राकर के सानिध्य मे अपनी कला यात्रा प्रारंभ की,अपने कला के दम पर टेलीफिल्म लोरिकचंदा मे लोरिक की प्रमुख भूमिका निभाई जिसमे उन्होने सशक्त एवं जीवंत अभिनय कर अपनी भूमिका पर खुब वाहवाही बटोरी जिसका प्रसारण दिल्ली दुरदर्शन से किया गया।

समय के साथ सोनहा बिहान के बिखराव के बाद ग्राम अर्जुन्दा मे ही स्कूली बच्चो एवं स्थानीय कलाकारो को लेकर छोटी बड़ी प्रस्तुतियां देने लगे । लोरिक चंदा के समय उनका संपर्क प्रख्यात कला निर्देशक रामहृदय तिवारी से हुआ उन्होने तिवारी जी से अत्यंत प्रभवित होकर उन्हे अपना गुरू मान लिया आर फिर अन्य कलाकार रूपी अनगढ़ हीरो को अपने सकुशल हाथो से तराशने लगे , उसी समय लोक कलाकार लक्ष्मण च्रंद्राकर के साथ मिलकर टेली फिल्म कांेपल का निर्माण किया लक्ष्मण च्रंद्राकर जैसै उत्साही , अनुभवी उर्जावान एवं अनुशासित कलामित्र कलाकार के संग पाकर दीपक और अधिक प्रकाशमान होते चले गये।

दीपक जी का आज लोकरंग खुद की अपनी संस्था है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान मिल चुकी है जिसे दीपक जी ने रचा और गढ़ा है उन्होने निश्चित ही पसीने की जगह अपना खुन बहाया है जो उनकी सफलता का परिचायक है ।प्रधानमंत्री राष्ट्रपति जैसै विशिष्ट एवं महान हस्तियो ने भी लोकरंग की प्रस्तुतियो को सराहा है एवं उन्हे सम्मानित भी किया है ,महान संत मोरारी बापू भी लोकरंग की प्रस्तुति देखकर दीपक जी को सम्मानित भी कर चुके है। एक ओर जंहा लोक कला मंच की प्रस्तुतियो मे लगे है वंही दुसरी ओर गम्मतिहा एवं आने वाली अन्य फिल्म के माध्यम से साफ सुथरी एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को उकेरती फिल्मो का निर्माण कर उसे दर्शको तक पंहुचाने मे लगे है ।

लोकरंग के महक से आज अर्जुन्दा की पहचान बनी है जो निश्चित ही आज सभी क्षेत्रवासियो के लिए गौरव की बात है कि अनेकोनेक कला के सम्मानो से दीपक जी को पुरस्कृत किया गया है लोककला की संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा मे जो उन्होने कार्य किया है उसके लिए उनके शुभेच्छु जन एवं कलाकार वर्ग उनके लिए पद्म श्री जैसै पुरस्कारो की अपेक्षा करते आ रहे है जो उनके कला यात्रा को और भी सुशोभित करेगा।

रीतेश देवांगन
ग्राम – टिकरी (अर्जुन्दा)
गुंडरदेही, जिला बालोद

(2018 में लिखा गया लेख)

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