झिल मिल दीपक जल उठे…
जिसने भी इस ख़बर को सुना सर पकड़ लिया,
कल एक दिये ने आंधी का कॉलर पकड़ लिया !
~ मुनव्वर राना
झिल मिल दीपक जल उठे,हुई है’ रौशन रात!
नभ से किसने उलट दी, तारों भरी परात !!
~ डा नरपत आशिया “वैतालिक”
ये रौशनी यूँ ही आगोश में नहीं आती
चराग़ बन के मुंडेरों पे जलना पड़ता है
~ हसन जमील
रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़
कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है
~ इरफ़ान सिद्दीक़ी
( चार दोहे )
बिखरे पत्ते ताश के , भरे हुए हैं जाम !
दीवाली की आड़ में , कैसे कैसे काम !!
जगमग आतिश बाजियां , रौशन है आकाश !
और सितारे ढो रहे , अंधियारे की लाश !!
अरबों का सोना बिका , हैरत में बाज़ार !
कहाँ मुल्क में मुफलिसी , पूछ रही सरकार !!
चालें हैं बाज़ार की , धनतेरस क्या ईद !
त्योहारों के नाम पर , होती जेब शहीद !! .
~ विजेंद्र सर
मैं चाहता हूँ कि दीपक जले , हवा न चले
मैं उस से प्यार करूँ और उसे पता न चले
~ तनवीर ग़ाज़ी
मुझको चराग़े शाम की सूरत जला के देख,
आ ऐ अंधेरी रात मुझे आजमा के देख।
टूटी हुई मुंडेर पे छोटा सा इक चराग,
मौसम से कह रहा है कि आंधी चला के देख।
~ नसीम निकहत
बडे सलीक़े बडी सादगी से काम लिया,
दिया जला के अंधेरों से इंतक़ाम लिया !!
~ अतुल अजनबी
हवा के वार पे अब वार करने वाला है…
चिराग़ बुझने से इनकार करने वाला है..
~ विकास शर्मा ‘राज़’
आँधियों का सिलसिला चलता है तो चलता रहे ।
पर हमारे हौसले का दीप भी जलता रहे ।।
~ कल्पना शुक्ला
आँखो के दो चराग लिए कबसे राह में
मैं ढूँढती हूँ ख़ुद को किसी की निगाह में
~ आयुषी राखेचा
जानते हैं आपको सब, कितना दम है
सूतली है लंबी पर, बारूद कम है 🤣🤣
~ आयुषी राखेचा
बुझता हुआ चराग उजालों से कह गया
जिसके लिए जलाया था, आने से रह गया
~ आयुषी राखेचा