March 6, 2026
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जिसने भी इस ख़बर को सुना सर पकड़ लिया,
कल एक दिये ने आंधी का कॉलर पकड़ लिया !

~ मुनव्वर राना

झिल मिल दीपक जल उठे,हुई है’ रौशन रात!
नभ से किसने उलट दी, तारों भरी परात !!

~ डा नरपत आशिया “वैतालिक”

ये रौशनी यूँ ही आगोश में नहीं आती
चराग़ बन के मुंडेरों पे जलना पड़ता है

~ हसन जमील

रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़
कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है

~ इरफ़ान सिद्दीक़ी

( चार दोहे )

बिखरे पत्ते ताश के , भरे हुए हैं जाम !
दीवाली की आड़ में , कैसे कैसे काम !!

जगमग आतिश बाजियां , रौशन है आकाश !
और सितारे ढो रहे , अंधियारे की लाश !!

अरबों का सोना बिका , हैरत में बाज़ार !
कहाँ मुल्क में मुफलिसी , पूछ रही सरकार !!

चालें हैं बाज़ार की , धनतेरस क्या ईद !
त्योहारों के नाम पर , होती जेब शहीद !! .

~ विजेंद्र सर

मैं चाहता हूँ कि दीपक जले , हवा न चले
मैं उस से प्यार करूँ और उसे पता न चले
~ तनवीर ग़ाज़ी

मुझको चराग़े शाम की सूरत जला के देख,
आ ऐ अंधेरी रात मुझे आजमा के देख।
टूटी हुई मुंडेर पे छोटा सा इक चराग,
मौसम से कह रहा है कि आंधी चला के देख।

~ नसीम निकहत

बडे सलीक़े बडी सादगी से काम लिया,
दिया जला के अंधेरों से इंतक़ाम लिया !!

~ अतुल अजनबी

हवा के वार पे अब वार करने वाला है…
चिराग़ बुझने से इनकार करने वाला है..

~ विकास शर्मा ‘राज़’

आँधियों का सिलसिला चलता है तो चलता रहे ।
पर हमारे हौसले का दीप भी जलता रहे ।।

~ कल्पना शुक्ला

आँखो के दो चराग लिए कबसे राह में
मैं ढूँढती हूँ ख़ुद को किसी की निगाह में

~ आयुषी राखेचा

जानते हैं आपको सब, कितना दम है
सूतली है लंबी पर, बारूद कम है 🤣🤣

~ आयुषी राखेचा

बुझता हुआ चराग उजालों से कह गया
जिसके लिए जलाया था, आने से रह गया

~ आयुषी राखेचा

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