July 23, 2026

बाबा मैं इंसान बनूँगा

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पढ़कर -लिखकर आगे बढ़कर
उन्नति की मैं, चोटी चढ़कर
राष्ट्र का अरमान बनूँगा।
बाबा मैं इंसान बनूँगा।

नहीं बनूँगा डाॅक्टर मास्टर
नहीं बनूँगा मैं इंस्पेक्टर
मैं अब नया बिहान बनूँगा।
बाबा मैं इंसान बनूँगा।

सीमा पर प्रहरी बन जाऊँ
प्राण त्याग, शहीद कहलाऊँ
तिरंगे की पहचान बनूँगा।
बाबा मैं इंसान बनूँगा।

दीन – दुखियों की सेवा करके
अपने सब अवगुणों को हर के
मैं सच्चा ज्ञानवान बनूँगा।
बाबा मैं इंसान बनूँगा।

भेद – भाव मैं नहीं करूँगा
पर सेवा में ध्यान धरूँगा
भावयुक्त संविधान बनूँगा
बाबा मैं इंसान बनूँगा।

-बलदाऊ राम साहू
दुर्ग, छत्तीसगढ.

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