हरि भटनागर को रूस का शोलअख़फ़ सम्मान
मसक्वा।हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार एवम संपादक हरि भटनागर को रूस का मिख़अईल शोलअख़फ़ सम्मान देने की घोषणा की गई है।
भारत मित्र समाज, मसक्वा द्वारा भारतीय कथाकारों के लिए विशेष रूप से स्थापित यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी एक कथाकार को दिया जाएगा।
वर्ष 2026 के लिए यह प्रथम वार्षिक सम्मान हरि भटनागर को देने का निर्णय लिया गया है।
यह सम्मान 1905 में जन्मे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध रूसी लेखक मिखाइल शोलअखफ की स्मृति में दिया जायेगा जो एक प्रसिद्ध रूसी उपन्यासकार थे, ।उन्हें उनके महाकाव्य उपन्यास ‘एंड क्वाइट फ्लोज द डॉन’ (And Quiet Flows the Don) के लिए 1965 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
भारत मित्र समाज द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार श्री भटनागर को
मुख्य रूप से भारत के निम्न वर्ग और दलितों व आदिवासियों के जीवन के यथार्थ को अपनी रचनाओं में व्यक्त करने और विषम परिस्थितियों में उनके संघर्ष और जिजीविषा को स्वर देने तथा अत्यन्त कठिन सामाजिक जीवन जीने के बावजूद जीवन के प्रति आसक्ति, प्रेम और मार्मिकता को बनाए रखने और भारतीय समाज की विद्रूपताओं के विरुद्ध प्रतिरोध और संघर्ष करने तथा समाज में व्याप्त राजनैतिक भय और तिरस्कार, दमन, धर्मान्धता, शोषण और क्रूरताओं का प्रतिकार करने का संकल्प करने वाली जीवन-दृष्टि को अपने कृतित्व का विषय बनाने के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।
मिख़अईल शोलअख़फ़ सम्मान की घोषणा करते हुए भारत मित्र समाज, मसक्वा के महासचिव अनिल जनविजय ने बताया कि निर्णायक मण्डल में रूसी भारतविज्ञ अलिक्सान्दर सेंकेविच, कवि ततियाना फ़िलिपवा,कथाकार रमान सेनचिन, कथाकार ज़ख़ार प्रिलेपिन और कवि ईगर सीद शामिल थे।
मूल रूप से मानवीय संवेदना के पक्ष में खड़े नज़र आने वाले लेखक हरि भटनागर का जन्म
1955 में उत्तर प्रदेश के बहुत ही छोटे कस्बे राठ, हमीरपुर में हुआ था ।उनक़ा
प्रारम्भिक जीवन सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में गुज़रा। सुल्तानपुर और लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की। उनके सात कहांनी संग्रह और दो उपन्यास छप चुके हैं।उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत दैनिक पत्रों से की। ‘अमर उजाला’, ‘हितवाद’ जैसे राष्ट्रीय पत्रों से लम्बे समय तक सम्बद्ध रहे। ‘सग़ीर और उसकी बस्ती के लोग’, ‘बिल्ली नहीं, दीवार’, ‘नाम में क्या रखा है’, ‘सेवड़ी रोटियाँ’ प्रकाशित कथा संग्रह। ‘एक थी मैना एक था कुम्हार’ उपन्यास। उपन्यास पर एक एनिमेशन फ़िल्म निर्माण प्रक्रिया में। कहानियाँ उर्दू, मलयालम, मराठी, पंजाबी के साथ रूसी, अंग्रेज़ी और फ्रेंच में अनूदित। 25 वर्षों तक मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् की पत्रिका ‘साक्षात्कार’ के सम्पादन से सम्बद्ध रहे। रूस के पुश्किन सम्मान समेत देश के राष्ट्रीय श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार, दुष्यन्त कुमार सम्मान एवं वागीश्वरी पुरस्कार से पुरस्कृत। रूस, अमेरिका, ब्रिटेन की साहित्यिक और सांस्कृतिक यात्राएँ। विश्व हिन्दी सम्मेलन, 2003 (सूरीनाम), विश्व हिन्दी सम्मेलन, 2007 (न्यूयार्क) में सक्रिय हिस्सेदारी। मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग में उपनिदेशक तथा पंजाबी साहित्य अकादमी एवं मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक रहे हरि भटनागर वर्तमान में साहित्यिक पत्रिका ‘रचना समय’ के सम्पादक
हिन्दी साहित्य के अनेक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित हरि भटनागर को 1999 में रूस का पूश्किन सम्मान मिला था। उसके बाद उन्हें श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार, दुष्यन्त कुमार सम्मान, वनमाली कथा सम्मान, शिवना अन्तरराष्ट्रीय सम्मान और कथा यू० के० जीवन गौरव सम्मान आदि दस से ज़्यादा पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
उनकी कहानियों का अनुवाद रूसी, जर्मन, स्पानी, पोलिश, अँग्रेज़ी, उर्दू, मलयालम, मराठी और पंजाबी सहित दस से अधिक देश-विदेश की भाषाओं में हो चुका है। वे साहित्यिक पत्रिका ’रचना समय’ के सम्पादक हैं। हरि भटनागर इन दिनों भोपाल में रहते हैं