स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर द्वारा गाये एकमात्र छत्तीसगढ़ी गीत “छुट जाही अँगना-बारी” के गीतकार मदन शर्मा का निधन
स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर द्वारा गाये एकमात्र छत्तीसगढ़ी गीत “छुट जाही अँगना-बारी” के गीतकार मदन शर्मा का निधन
करंजा भिलाई निवासी, चंदैनी गोंदा एवं सोनहा बिहान जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच के वरिष्ठ कलाकार मदन शर्मा का आज निधन हो गया। वे जितने कुशल गीतकार थे, उतने ही कुशल ढोलक-वादक भी थे। मदन शर्मा जी पेशे से शिक्षक थे और सन् 2008 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनका जन्म 31.08.1946 को हुआ था। मदन शर्मा जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, वे प्रहसन के सिद्धहस्त कलाकार भी थे।
इंदिरा संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में जब स्वर-कोकिला लता मंगेशकर को डी. लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाना था तब मदन शर्मा जी ने तत्कालीन कुलपति डॉ. अरुण कुमार सेन जी से अनुरोध किया था कि उन्होंने मो. रफी के गीत में ढोलक बजाया था और वे लता मंगेशकर साथ भी ढोलक बजाना चाहते हैं। कुलपति महोदय ने अनुरोध स्वीकार भी कर लिया था किंतु लता मंगेशकर जी ने उस समारोह में गीत ही नहीं गाया था, अतः मदन शर्मा जी की इच्छा अधूरी रह गई थी। उसी दिन उन्होंने संकल्प लिया था कि एक न एक दिन वे लता मंगेशकर से छत्तीसगढ़ी गीत जरूर गवाएंगे।
उन्होंने नवम्बर 2004 में बम्बई जाकर लता मंगेशकर से इस हेतु अनुरोध किया था किन्तु स्वास्थ्य ठीक नहीं होने का कारण बताते हुए लता जी तैयार नहीं हुई थीं। तब मदन शर्मा जी ने लता जी की छोटी बहन उषा मंगेशकर जी से संपर्क किया। लगभग तीन महीने के सतत प्रयास के बाद उषा मंगेशकर की अनुशंसा से लता जी गाने को तैयार हुईं किन्तु शर्त यह रखीं कि अगर प्रेम गीत होगा तो नहीं गाऊंगी तब उन्हें बताया गया कि यह गीत बेटी की बिदाई का गीत है। तब लता मंगेशकर ने फ़िल्म भकला के लिए उनके लिखे गीत “छुट जाही अँगना-बारी” को अपनी आवाज में रिकार्ड कराया। यह गीत 22 फरवरी 2005 को रिकार्ड हुआ था और मदन शर्मा जी का संकल्प पूरा हुआ था।
सन् 1982 में दुर्ग के ताज अली थारानी जी ने पॉलिडोर (म्यूज़िक इंडिया लि.) मुम्बई में ग्यारह ई.पी. रिकार्ड्स बनवाये थे जिनमें कुल 36 गीतों की रिकार्डिंग हुई थी। इन सभी गीतों में मदन शर्मा जी ने ढोलक बजाया था। ये सभी गीत अमर हो चुके हैं। ये गीत हैं – मोर संग चलव रे, पता ले जारे गाड़ी वाला, हम तोरे सँगवारी कबीरा हो, बखरी के तुमा नार , तोर खोपा मा फुँदरा रइहँव बन के, संगी के मया जुलुम होगे रे , मन डोले रे माघ फगुनवा, वारे मोर पँड़की मैना, कइसे दीखथे आज उदास कजरेरी मोर मैना, बन्दन वारा दुवार चारा , नाच नचनी ओ झूम झुमके झमाझम, परगे किनारी मा चिन्हारी ये लुगरा तोर मन के नोहय, अहो मन भजो गनपति गनराज, जय हो जय सरसती माई, सावन आगे, आबे आबे आबे आबे संगी मोर, मोला जावन दे ना रे अलबेला, मोर धरती मइया जय होवै तोर, जय हो बम्लेश्वरी मैया, तोर सुरता मा ये मन भँवरा
चौरा मा गोंदा रसिया मोर बारी म पताल, हमका घेरीबेरी घूर घूर निहारे ओ बलमा पान ठेला वाला, लहर मारे लहर बुंदिया, छन्नर छन्नर पैरी,खन्नर खन्नर चूरी, फिटिक अँजोरी निर्मल छइयाँ, मंगनी मा मांगे मया नइ मिले रे मँगनी मा, धनी बिना जग लागे सुन्ना रे नइ भावै मोला, प्रानी तरी जाए रामा चोला तर जाई, तोर बाली हे उमरिया, चलो मन बँसरी बजाए जिहाँ मोहना ओ, मोर झुलतरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फुलगे, तोर रूप गजब मोला मोह डारिस, तैं अगोर लेबे रे संगी संझा के बेरा तँय अगोर लेबे, तँय बिलासपुरहिन अस अउ मँय रइगढ़िया, तैं ह आ जाबे मैना उड़त उड़त तैं हा आ जाबे
का तैं मोला मोहनी डार दिए गोंदा फूल और तुक के मारे रे नैना के बान बइरी।
मदन शर्मा जी लोक मंच सोनहा बिहान से भी काफी समय तक जुड़े रहे। उनके लिखे गीत “अमरैया चिरैया किलोर भइगे, मोला आन दे, मोला आजान दे” को सुप्रसिद्ध लोक गायिका ममता चन्द्राकर और कुलेश्वर ताम्रकार ने गाया था। मदन शर्मा जी के गीत “मया के मारे मया मा मर जाय” और “जुलुम होगे राम” को लोक गायक महादेव हिरवानी ने अपना स्वर दिया है।
मदन शर्मा जी काफी समय से अस्वस्थ थे। उन्हें शंकरा मेडिकल कालेज हॉस्पिटल, जुनवानी में भर्ती किया गया था और आज उन्होंने इसी अस्पताल में अंतिम साँस ली। उनके निधन पर चंदैनी गोंदा के उद्घोषक डॉ. सुरेश देशमुख, लोक गायक महादेव हिरवानी, लोक गायिका ममता चन्द्राकर, चंदैनी गोंदा की गायिका कविता वासनिक, अनुराग (ठाकुर) चौहान, शैलजा ठाकुर, लोक नाट्य कारी के कलाकार विवेक वासनिक, भरथरी गायिका हिमानी वासनिक ने गहरा दुःख प्रकट करते हुए अपनी भाव-भीनी श्रद्धांजलि समर्पित की है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी मदन शर्मा जी का जाना छत्तीसगढ़ ऑफ छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के लिए अपूरणीय क्षति है।
अरुणकुमार निगम