सावन ने प्रेम लिखा है
सावन ने प्रेम लिखा है,
हर पत्ती के हरे अधर पर।
बादल ने संदेश सुनाया,
भीगी-भीगी हर डगर पर॥
महुए की मादक खुशबू में,
मन का हर संकोच पिघल जाए।
तेरा मेरा मौन मिलन भी,
बूँदों में चुपचाप निखर जाए॥
पीपल, नीम, गुलमोहर, आम,
सबने बाँहें आज पसारी हैं।
लगता है इन वृक्षों ने भी,
प्रेम-कथाएँ खूब सँवारी हैं॥
नन्हा पौधा मुस्काता जैसे,
जीवन का पहला विश्वास।
हमने मिलकर उसे लगाया,
जुड़ गया धरती से मधुमास॥
तेरी आँखों की हरियाली,
वन की छाया-सी लगती है।
मेरे मन की सूनी धरती,
तेरे स्पर्श से सजती है॥
कोयल मीठे गीत सुनाए,
पायल-सी रिमझिम बरसे।
तेरा हाथ थामकर चल दूँ,
सपनों के इस भीगे रास्ते॥
चलो लगाएँ प्रेम के पौधे,
हर आँगन, हर गाँव, नगर में।
जब-जब सावन लौटे धरती पर,
तुम खिलना मेरे ही अंतर में॥
सावन केवल ऋतु नहीं है,
प्रेम का सबसे मधुर विधान।
एक वृक्ष, एक सच्चा रिश्ता–
दोनों ही देते हैं जीवनदान॥
डाॅoचित्रलेखा