हो जाती है उन लड़कियों को…
हो जाती है
उन लड़कियों को
ख़ुद से ही नफ़रत,
जो दिमाग़ की चौखट पर
दिल की दस्तक सुनती हैं।
वे रिश्तों में उतर जाती हैं ऐसे,
जैसे कोई बारिश में
छतरी भूल जाए
और फिर भीगते हुए
घर लौटना चाहे।
वे भरोसा करती हैं इतना
कि सामने वाले की ख़ामोशी में भी
कोई अर्थ खोज लेती हैं,
उसकी बेरुख़ी में भी
एक छिपा हुआ अपनापन।
और फिर एक दिन
वही ख़ामोशी
उनके भीतर शोर करने लगती है
इतना शोर
कि वे ख़ुद ख़ामोश हो जाती हैं।
समझ आता है किसी रोज़
जिसे वे अपने आकाश का
सबसे चमकता हुआ तारा समझती रहीं,
उसकी रात में तो
वे बस एक गुज़रता हुआ
धुआँ थीं।
उन्होंने कितनी बार
अपनी धूप समेटकर
उसकी छाँह को घर कहा,
अपनी बेचैनी दबाकर
उसकी सहजता को अपना सुकून।
और कभी यह नहीं सोचा
किस उजाले की उम्मीद में
कोई उनकी ओर मुड़ेगा,
किस अनदेखे अनुराग की
वे इतनी हक़दार थीं
कि अपने ही हिस्से की रोशनी छोड़कर
किसी और की आँखों में
अपना चेहरा तलाशती रहीं।
लौटकर जब
उन्होंने अपने भीतर टटोला,
तो अपनी आवाज़ की जगह
किसी और के बोले हुए शब्द
देर तक काँप रहे थे।
यहीं पड़ती है
एक गहरी दरार
किसी की आँखों में
ख़ास दिखाई देने की चाह में
वे धीरे-धीरे
अपनी ही आँखों से उतर जाती हैं।
नीना andotra