लघुकथा : कबाड़
"आपके घर पुताई होते हुए देखकर ही मैं समझ गया था कि इस बार तो बहुत सामान मिलने वाला है...।"...
"आपके घर पुताई होते हुए देखकर ही मैं समझ गया था कि इस बार तो बहुत सामान मिलने वाला है...।"...
अभी मोपासा को पढने का अवसर मिला है. गाय-दी-मोपासा फ्रेंच कथाकार हैं और वे निर्विवाद रूप से फ़्रांस के महान...
लेखक - डॉ. विनोद कुमार वर्मा, सुप्रसिद्ध व्याकरणाचार्य व कहानीकार, बिलासपुर पाठकीय प्रतिक्रिया - कुबेर उवत सुरुज के अगोरा सुप्रसिद्ध...
“ ख्वाब सा कुछ “ उपन्यास लेखक – संजय मनहरण सिंह लोकभारती प्रकाशन – २०२४ ( प्रथम संस्करण ) ---------------------------------------------------------------------------------------------------------...
आइसलैंडिक भाषा में एक कहावत है : “हर किसी के पेट में एक किताब होती है।” यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही...
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में रविवार को आज आयोजित कलेक्टर कॉन्फ्रेंस 2025 में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की...
(आज की लघुकथा) मसला थोड़ा टेढ़ा था। फूँक-फूँककर बढ़ना था। ख्याति नाम सम्मान भी उसमें जुड़ना था। धन, साधन, और...
निदा साहब आज ज़िंदगी की 87 वीं सीढ़ी पर खड़े होकर दुनिया को देख रहे होते ! उनकी यह ग़ज़ल...
हिन्दी नवगीत के प्रखर रचनाकार भाई भारतेन्दु मिश्र ने भी अपने लिए ज़िन्दगी का नेपथ्य चुन लिया। उन्हीं के एक...
एक बार दो मित्र चाँदनी रात में नदी के किनारे घूम रहे थे। एक मित्र को अचानक पानी के बहाव...