April 3, 2025

सिनेमा

के. पी. अनमोल को प्रयोगधर्मी ग़ज़लकार कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी

*– सोनिया वर्मा* आप छोटे हों या बड़े, मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से ही क़ामयाबी मिलती है। सतत प्रयत्न...

फ़िल्म ‘रंग दे बसंती’ : राकेश ओमप्रकाश मेहरा(2006)

युवावस्था जीवन का वह पड़ाव है जहां सर्वाधिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।प्रेम हो, संघर्ष हो कि शारीरिक श्रम इसी...

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमारा, न कोई उस पार

रेणु की चर्चित कहानी 'तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा होती रही...

फ़िल्म ‘सत्यकाम’ : हृषिकेश मुखर्जी (1969)

आजादी के संघर्ष के दौरान यह सपना देखना स्वभाविक था कि स्वतंत्रता के बाद देश का अपने ढंग,अपनी आकांक्षाओं के...

फ़िल्म ‘सत्यकाम’ : हृषिकेश मुखर्जी (1969)

आजादी के संघर्ष के दौरान यह सपना देखना स्वभाविक था कि स्वतंत्रता के बाद देश का अपने ढंग,अपनी आकांक्षाओं के...

बूट पॉलिश : मैं भीख नहीं माँगूँगा

बच्चे देश के भविष्य होते हैं। किसी देश के वर्तमान और भविष्य का आकलन वहां के बच्चों की स्थिति को...

फ़िल्म ‘अर्धसत्य’ : गोविंद निहलानी (1983)

फिल्मों में सामान्यतः पुलिस की छवि यथार्थपरक नहीं होती। अतिरंजित ढंग से या तो उसे अत्यंत 'पतित' दिखाया जाता है,अथवा...