जागते रहो : राजकपूर (1956)
जब हम कलाकार से यथार्थ के चित्रण की अपेक्षा रखते हैं तो उसमे अनिवार्यतः यह भी निहित होता है कि...
जब हम कलाकार से यथार्थ के चित्रण की अपेक्षा रखते हैं तो उसमे अनिवार्यतः यह भी निहित होता है कि...
दुनिया की भौतिकता को हम इन्द्रियबोध से समझते है। रूप,रस,गंध,स्पर्श का अनुभव इंद्रियों से ही होता है। इनमें भी आँखों...
यह अपेक्षा की जाती है कि वृद्धावस्था में व्यक्ति आजीविका के सांसारिक कार्य-व्यापारों से मुक्त होकर अपने परिवार के बीच,...
4 अप्रेल 1904 में जबलपुर,मध्य प्रदेश के एक पठान परिवार में जन्मे याक़ूब महबूब ख़ान, जिन्हें याक़ूब के नाम से...
प्रेम और सम्वेदना मनुष्य की सहजवृत्ति हैं। हमारा संवेदनात्मक लगाव केवल 'अपनों' से नहीं अपितु 'दूसरों' से भी हो सकता...
यह फ़िल्म एक 50 साल के इंसान की कहानी है जिसके पास नकारात्मक दिमाग कम और निर्दोष दिल ज्यादा है।...
प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'गोदान' सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में है।इस उपन्यास में तत्कालीन कृषक जीवन की विडम्बना को...
दोस्ती की जब-जब बात आती है तो मेरे मन में दो बेहद प्यारे लड़कों की तस्वीर तैर जाती है. मृदुल...
o अंजनी श्रीवास्तव (M)9819343822 "भावनाओं, संवेदनाओं और दार्शनिकता का सम्मिश्रण"-..."आगे से फटा जूता"- आपको सड़क के किनारे और कूड़े करकट...
प्रेमचंद तत्कालीन समाज के कुशल चितेरे हैं। वे समाज के अंतर्विरोधों, विडम्बनाओं से आँख नही चुराते बल्कि जोखिम की हद...