April 4, 2025

सिनेमा

फ़िल्म ‘स्पर्श’ : साई परांजपे (1980)

दुनिया की भौतिकता को हम इन्द्रियबोध से समझते है। रूप,रस,गंध,स्पर्श का अनुभव इंद्रियों से ही होता है। इनमें भी आँखों...

फ़िल्म ‘सारांश’ : महेश भट्ट (1984)

यह अपेक्षा की जाती है कि वृद्धावस्था में व्यक्ति आजीविका के सांसारिक कार्य-व्यापारों से मुक्त होकर अपने परिवार के बीच,...

जबलपुर की गुमनाम फिल्मी-हस्ती..

4 अप्रेल 1904 में जबलपुर,मध्य प्रदेश के एक पठान परिवार में जन्मे याक़ूब महबूब ख़ान, जिन्हें याक़ूब के नाम से...

फ़िल्म काबुलीवाला : बिमल राय, हेमेन गुप्ता(1961)

प्रेम और सम्वेदना मनुष्य की सहजवृत्ति हैं। हमारा संवेदनात्मक लगाव केवल 'अपनों' से नहीं अपितु 'दूसरों' से भी हो सकता...

फ़िल्म गोदान : त्रिलोक जेटली

प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'गोदान' सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में है।इस उपन्यास में तत्कालीन कृषक जीवन की विडम्बना को...

हृदयस्पर्शी सिनेमा का अनमोल एवं उत्कृष्ट उदाहरण है फ़िल्म ‘दोस्ती’

दोस्ती की जब-जब बात आती है तो मेरे मन में दो बेहद प्यारे लड़कों की तस्वीर तैर जाती है. मृदुल...

समीक्षा : पुस्तक “आगे से फटा जूता’

o अंजनी श्रीवास्तव (M)9819343822 "भावनाओं, संवेदनाओं और दार्शनिकता का सम्मिश्रण"-..."आगे से फटा जूता"- आपको सड़क के किनारे और कूड़े करकट...

फ़िल्म ‘सद्गति’ : सत्यजीत राय(1981)

प्रेमचंद तत्कालीन समाज के कुशल चितेरे हैं। वे समाज के अंतर्विरोधों, विडम्बनाओं से आँख नही चुराते बल्कि जोखिम की हद...