March 6, 2026

सिनेमा

बूट पॉलिश : मैं भीख नहीं माँगूँगा

बच्चे देश के भविष्य होते हैं। किसी देश के वर्तमान और भविष्य का आकलन वहां के बच्चों की स्थिति को...

फ़िल्म ‘अर्धसत्य’ : गोविंद निहलानी (1983)

फिल्मों में सामान्यतः पुलिस की छवि यथार्थपरक नहीं होती। अतिरंजित ढंग से या तो उसे अत्यंत 'पतित' दिखाया जाता है,अथवा...

फ़िल्म ‘स्पर्श’ : साई परांजपे (1980)

दुनिया की भौतिकता को हम इन्द्रियबोध से समझते है। रूप,रस,गंध,स्पर्श का अनुभव इंद्रियों से ही होता है। इनमें भी आँखों...

फ़िल्म ‘सारांश’ : महेश भट्ट (1984)

यह अपेक्षा की जाती है कि वृद्धावस्था में व्यक्ति आजीविका के सांसारिक कार्य-व्यापारों से मुक्त होकर अपने परिवार के बीच,...

जबलपुर की गुमनाम फिल्मी-हस्ती..

4 अप्रेल 1904 में जबलपुर,मध्य प्रदेश के एक पठान परिवार में जन्मे याक़ूब महबूब ख़ान, जिन्हें याक़ूब के नाम से...

फ़िल्म काबुलीवाला : बिमल राय, हेमेन गुप्ता(1961)

प्रेम और सम्वेदना मनुष्य की सहजवृत्ति हैं। हमारा संवेदनात्मक लगाव केवल 'अपनों' से नहीं अपितु 'दूसरों' से भी हो सकता...

फ़िल्म गोदान : त्रिलोक जेटली

प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'गोदान' सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में है।इस उपन्यास में तत्कालीन कृषक जीवन की विडम्बना को...