April 3, 2025

समीक्षा

अगरिया :लौहकर्म के आदिम असुर जनजाति

वेरियर एल्विन भारतीय मानवशास्त्र में एक चर्चित नाम हैं। उनका अध्ययन क्षेत्र मुख्यतः मध्य भारत के जनजातीय क्षेत्र रहा है।...

द डायरी ऑफ के यंग गर्ल-ऐन फ़्रैंक

अनुवाद-नीलम भट्ट समीक्षा- आरुषि प्रकाशक-मंजुल पब्लिशिंग हाउस डायरी पढ़ने का यह पहला मौका था। इस डायरी ने बहुत कुछ सोचने...

“लोकभाषा से उपजी सान्द्र संवेदना के नवगीत”

लोकप्रिय व्हाट्सएप नवगीत समूह 'संवेदनात्मक आलोक' के पाक्षिक आयोजन में इस बार- 'नवीन/पुनर्पाठ अंक'-3, के वरिष्ठ नवगीत कवि आनंद तिवारी...

समीक्षा : नव प्रकाशित काव्य संग्रह “शिलाएं मुस्काती हैं “

काव्य संग्रह का नाम : शिलाएं मुस्काती हैं लेखिका : यामिनी नयन गुप्ता पब्लिशर : प्रखरगूंज पब्लिकेशन मूल्य : 195/...

विजय बहादुर सिंह की पुस्तक,’जातीय अस्मिता के प्रश्न और जयशंकर प्रसाद’पर चर्चा।

पिछले तीस जून को मुक्तिबोध साहित्यिक मंच, इलाहाबाद ने वरिष्ठ आलोचक विजय बहादुर सिंह की अभी हाल ही में प्रकाशित...

संवेदनीयता को नुकीलापन देती लघुकथाएँ

संतोष श्रीवास्तव की कतिपय लघु कथाओं से साक्षात्कार समाजशास्त्र के कई पन्नों को दृश्यात्मक बनाता है। कहीं मामूली सा जीवन...

आवेग और आक्रोश से उपजी कविताओं की मुखर अभिव्यक्ति है- “ जब भी मिलना”

कोरोना काल में पढ़ी गई कुछ किताबें जो भीतर मंथन पैदा करती है उनमें फ़िनलैण्ड की कवयित्री मैर्ता तिक्कानेन की...