कभी-कभी गुनगुना लीजिए
आज और कुछ देर यूँ ही शोर मचाए रखिए। आसमाँ है तो उसे सर पर उठाये रखिए। उँगलियाँ गर नहीं...
आज और कुछ देर यूँ ही शोर मचाए रखिए। आसमाँ है तो उसे सर पर उठाये रखिए। उँगलियाँ गर नहीं...
राजी सेठ आज इस संसार से विदा हो गयीं... चुपचाप... बहुत मिलना चाहा...मिलना संभव नहीं हुआ... पहले वो जब भी...
( आलेख : स्वराज करुण ) छत्तीसगढ़ के सामाजिक ,सांस्कृतिक साहित्यिक और राजनीतिक इतिहास पर लोग आज जो कुछ भी...